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सेबी बदल सकता है बायबैक रूल्स, जानिए क्या होगा असर

प्रकाशित Wed, 22, 2019 पर 12:14  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मार्केट रेगुलेटर सेबी बायबैक के नियमों को बदलने वाली है। नए नियम के मुताबिक, जो कंपनियां अपने शेयर बायबैक करना चाहती हैं उन्हें अपने हिसाबकिताब में ग्रुप के कंसॉलिडेटे कर्ज को शामिल करना पड़ सकता है।


अभी तक बड़ी कंपनियां बायबैक करते हुए स्टैंडअलोन फाइनेंशियल्स पेश करती हैं। लेकिन अगर सेबी का नया नियम लागू हो जाता है तो बड़ी कंपनियों को कंसॉलिडेटेड कर्ज की जानकारी देनी होगी।


सेबी ने यह पॉलिसी रिव्यू ऐसे समय में किया है जब L&T के बायबैक के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था। इंजीनियरिंग से सॉफ्टवेयर बिजनेस तक दखल रखने वाली L&T ने इस साल जनवरी में बायबैक का प्रस्ताव रखा था। लेकिन सेबी ने यह प्रस्ताव इस आधार पर खारिज कर दिया कि बायबैक के बाद ग्रुप का कंसॉलिडेटेड डेट-इक्विटी रेशियो उसके पेडअप कैपिटल और रिजर्व का दोगुना हो जाएगा।


नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी L&T फाइनेंशियल सर्विसेज की वजह से L&T का कंसॉलिडेटेड नेट कर्ज बढ़ गया है। मार्केट रेगुलेटर का मानना है कि किसी ग्रुप की सब्सिडियरी की बैलेंसशीट भी ग्रुप का ही हिस्सा माना जाएगी। सेबी का यह भी मानना है कि फाइनेंस सब्सिडियरी को भी ग्रुप के लेवल पर ही माना जाना चाहिए। L&T के मामले में इसकी फाइनेंशियल कंपनी का डेट-टू-इक्विटी रेशियो 6:1 है।