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McDonalds के साथ क्यों बिगड़ी थी विक्रम बख्शी की बात

प्रकाशित Thu, 09, 2019 पर 15:48  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पिछले कुछ महीनों में आपने नोटिस किया होगा कि दिल्ली सहित उत्तर भारत के इलाकों में मैक्डोनाल्ड्स के ज्यादातर स्टोर बंद हो गए हैं। क्या आपने कभी सोचा कि मैक्डोनाल्ड्स का बर्गर जब इतना पसंद किया जाता है तो स्टोर क्यों बंद हो रहे हैं। इसकी वजह थी अमेरिकी फूड चेन कंपनी मैक्डोनाल्ड्स और उत्तर भारत में इसकी फ्रेंचाइजी लेने वाले विक्रम बख्शी के बीच अनबन होना।


बख्शी और मैक्डोनाल्ड्स के बीच 1995 में 50:50 में एक ज्वाइंट वेंचर बना। इस वेंचर का नाम कनॉट प्लाजा रेस्टोरेंट्स यानी CPRL था। अभी तक उत्तर भारत में CPRL ही मैक्डोनाल्ड्स की फ्रेंचाइजी संभाल रही थी। आज हम बता रहे हैं कि बख्शी और मैक्डोनाल्डस के बीच अनबन कब शुरू हुई और क्या थी इसकी वजह?


अगस्त 2013 


मैक्डोनाल्डस ने बख्शी पर मिसमैनेजमेंट का आरोप लगाते हुए CPRL के MD पद से हटा दिया।


सितंबर 2013


मैक्डोनाल्ड्स के खिलाफ बख्शी कंपनी लॉ बोर्ड का दरवाजा खटखटाया।


अक्टूबर 2013


मैक्डोनाल्ड्स इस मामले को लेकर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन कोर्ट में लेकर चली गई। बख्शी ने लॉ बोर्ड से अपील की।


जुलाई 2016


दिल्ली हाई कोर्ट ने मैक्डोनाल्ड्स को लंदन के इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन कोर्ट में मामले की सुनवाई की इजाजत दे दी। इस फैसले के खिलाफ बख्शी  सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंचे।


जुलाई 2017


नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल ने बख्शी को दोबारा CPRL का MD बना दिया। 


अगस्त 2017


मैक्डोनाल्ड्स  ने CPRL के साथ फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट खत्म कर लिया।


CPRL ने मैक्डोनाल्ड्स के सभी आउटलेट्स का ऑपरेशन जारी रखा।


मई 2019


मैक्डोनाल्ड्स और CPRL ने NCLAT को कहा कि वे सेटलमेंट करना चाहते हैं।


इसके बाद NCLAT ने दोनों कंपनियों को सेटलमेंट की शर्तें जमा करने का निर्देश दिया।


क्या है दाव पर


उत्तर और पूर्व भारत के करीब 165 मैक्डोनाल्डस आउटलेट्स।


इंडिया से मैक्डोनाल्ड्स का पहला मुनाफा


फिस्कल ईयर 2017-18 में 65.2 लाख रुपए का प्रॉफिट हुआ था।