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एमिरट्स ने एयर इंडिया में हिस्सेदारी लेने से साफ इनकार किया

एमिरट्स का भारत में पहले ही स्पाइसजेट और विस्तारा के साथ करार है
अपडेटेड Jan 29, 2020 पर 16:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पश्चिम एशिया की एयरलाइन कंपनी एमिरट्स (Emirates) सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया (Air India) में हिस्सेदारी नहीं लेना चाहती। एमिरट्स की भागीदारी फिलहाल स्पाइसजेट (SpiceJet) और टाटा के विस्तारा (Vistara) के साथ है।


एमिरट्स ने ईमेल के जरिए भेजे जवाब में CNBC-TV18 को बताया, "हमारी पार्टनरशिप स्पाइस जेट और विस्तार के साथ है। हमारे ग्राहक इन नेटवर्क तक पहुंच सकते हैं। हम अब एयर इंडिया में हिस्सेदारी नहीं लेना चाहते। हमारा फोकस फिलहाल ऑर्गेनिक ग्रोथ पर है।" एमिरट्स अभी तक पहली एयरलाइन कंपनी है जिसे औपचारिक तौर पर यह ऐलान कर दिया है कि वह एयर इंडिया में हिस्सेदारी नहीं लेगी।


एमिरट्स ने कहा, "भारत में हमारा कारोबारी सफर प्रोग्रेसिव इनवेस्टमेंट, पार्टनरशिप और ग्रोथ के आधार पर है। हमने दिल्ली और मुंबई के लिए दो डायरेक्टर रूट के साथ शुरुआत की थी। आज भारत के 9 शहरों में हर हफ्ते 170 फ्लाइट है।"


भारत में एमिरट्स की पहली फ्लाइट 1985 में शुरू हुई थी। तब दुबई से दिल्ली और मुंबई के लिए एमिरट्स ने उड़ान शुरू की थी। फिलहाल दुबई से अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोच्चि, कोलकाता, मुंबई और तिरुवनंतपुरम के लिए फ्लाइट्स हैं।


27 जनवरी 2020 को सरकार ने एयर इंडिया और इसकी दो सब्सिडियरी में 100 फीसदी हिस्सेदारी के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे। सरकार एयर इंडिया की बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयरपोर्ट सर्विस कंपनी AISATS में भी पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। एयर इंडिया के लिए टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख 17 मार्च है।


एयर इंडिया पर कुल 60,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। लेकिन सरकार खरीदारों को राहत देने के लिए इसका बाकी कर्ज AIAHL (एयर इंडिया एसेट्स होल्डिंग लिमिटेड) को ट्रांसफर कर देंगे। इस तरह एयर इंडिया खरीदने वालों की जवाबदेही सिर्फ 23,286 करोड़ रुपए की रहेगी। एयर इंडिया के लिए अभी तक किसी कंपनी बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई है।


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