Moneycontrol » समाचार » कंपनी समाचार

भगवान भी Infosys के नंबर चेंज नहीं कर सकते: नंदन नीलेकणी

Infosys ने बताया, व्हिसलब्लोअर की तरफ से कोई सबूत नहीं मिला है और वे कंपनी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं
अपडेटेड Nov 07, 2019 पर 09:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Infosys ने बुधवार को कड़े शब्दों में कहा कि कंपनी की छवि बिगाड़ने के लिए गुमनाम लोगों ने आरोप लगाया है। Infosys ने कहा कि कुछ गुमनाम लोगों ने कंपनी के संस्थापक और पूर्व सहयोगियों के खिलाफ गलत आरोप लगाए थे।  


Infosys के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा, " ये आरोप कंपनी की छवि खराब करने के लिए की गई थी। मैंने अपने सह-संस्थापकों के साथ पूरी जिंदगी कंपनी को दिया है। उन्होंने मिलकर यह संस्थान बनाया है जो आज भी निस्वार्थ भाव से काम कर रही है।"


Infosys ने इससे पहले सोमवार को कहा कि हालांकि अभी उसे व्हिसलब्लोअर की शिकायतों के सपोर्ट में कोई सबूत नहीं मिला है। व्हिसलब्लोअर का आरोप है कि कंपनी के अधिकारी कंपनी में गड़बड़ियां कर रहे हैं।


बुधवार को नंदन नीलेकणी ने कहा, "व्हिसलब्लोअर के आरोपों से वह अपमानित महसूस कर रहे हैं। भगवान भी इंफोसिस के नंबर चेंज नहीं कर सकते हैं।" नीलेकणी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि व्हिसलब्लोअर का आरोप है कि कंपनी के अधिकारी नतीजों में गलत नंबर दिखाते हैं ताकि शेयर प्राइस चढ़े। इसके साथ ही नीलेकणी ने साफ किया कि वो जांच को लेकर पक्षपात नहीं कर सकते हैं।


बुधवार को Infosys ने कहा, " इस लेवल पर मौजूदा हालात को देखें तो पहली नजर में कोई सबूत नहीं मिलता। गुमनाम लोगों ने कंपनी के खिलाफ जो शिकायत की है उसकी जांच चल रही है। कंपनी अभी इन शिकायतों की विश्वसनीयता तय नहीं कर पाई है।"


Infosys ने कहा कि ऑडिट कंपनी ने एक एक्सटर्नल लॉ फर्म को हायर किया है जो गुमनाम लोगों के शिकायतों की जांच करेगी। कंपनी ने कहा, "जांच के बाद जो रिपोर्ट आएगी, हम उसे सबके साथ शेयर करेंगे।"


इस खबर के बाद कंपनी के शेयर 2 फीसदी बढ़कर 707 रुपए पर पहुंच गए। पिछले महीने Infosys ने स्टॉक एक्सचेंज को यह जानकारी दी थी कि कुछ गुमनाम व्हिसलब्लोअर ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।


क्या है पूरी कहानी?


कंपनी के कुछ गुमनाम कर्मचारियों ने "Ethical Employess" के नाम से 20 सितंबर को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को दो पेज का लेटर भेजा था, जो कि Deccan Chronical ने अपनी वेबसाइट पर छापा है। इस लेटर में लिखा है, "पारेख और रॉय पिछली कई तिमाहियों से कंपनी में कुछ गड़बड़ी कर रहे हैं। इसके सबूत में उनके ईमेल और वॉयस रिकॉर्डिंग भेजा जा रहा है।"


हालांकि इस लेटर का बोर्ड की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद एक गुमनाम व्हिसलब्लोअर ने एथिकल एंप्लॉयीज की तरफ से 3 अक्टूबर को अमेरिका के व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन प्रोग्राम को लेटर लिखकर बताया कि अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 तिमाही तक इंफोसिस की बैलेंसशीट्स में अकाउंटिंग से जुड़ी गड़बड़ियां की गई हैं।


व्हिसलब्लोअर के लेटर में लिखा गया है, "पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में हमें कहा गया है कि वीजा कॉस्ट को पूरी तरह ना जोड़ा जाए ताकि कंपनी का प्रॉफिट बेहतर दिखे। हमने इस बातचीत की वॉइस रिकॉर्डिंग भी कर ली है। फिस्कल ईयर 2019-20 में तिमाही नतीजों के दौरान हमपर इस बात का दबाव बनाया गया था कि 5 करोड़ डॉलर के अपफ्रंट पेमेंट के लौटाने का जिक्र ना किया जाए। ऐसा होने से कंपनी का प्रॉफिट कम दिखेगा और इसका असर शेयर प्राइस पर पड़ेगा।"


"ऑडिटर्स और कंपनी के बोर्ड से अहम जानकारियां छिपाई गईं। वेरिजॉन, इंटेल और जापान में JV जैसे जो बड़े डील हुए हैं उनमें रेवेन्यू का मामला अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं था। कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि वो ऑडिटर्स को बड़े डील की जानकारी ना दें। CEO रिव्यू और अप्रूवल्स की अनदेखी कर रहे हैं और उन्हें सेल्स टीम को निर्देश दे रहे हैं कि वो अप्रूवल के लिए मेल ना करें। वह उन्हें मार्जिन के लिए गलत अनुमान लगाने को कह रहे हैं।"


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।