Moneycontrol » समाचार » कंपनी समाचार

एस्सार स्टील पर आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला क्यों इतना अहम है, जानिए पूरा मामला?

इस फैसले के बाद स्टील टायकून लक्ष्मी मित्तल अपनी ग्लोबल कंपनी आर्सेलर मित्तल की एंट्री इंडिया में करा सकती है
अपडेटेड Nov 18, 2019 पर 09:02  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) के प्रभुत्व (Supermacy) को बनाए रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी कंपनी के दिवालिया होने पर उसके क्लेम में सबसे ऊपर CoC होंगे जिसमें फाइनेंशियल क्रेडिटर्स शामिल हैं।


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही एस्सार स्टील (Essar Steel) के रेज्योलूशन का रास्ता साफ हो गया है। इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की प्रक्रिया में चल रही यह सबसे पुराना मामला है। RBI ने IBC के तहत जिन एक दर्जन दिवालिया कंपनियों को कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रक्रिया के लिए NCLAT में भेजा था, एस्सार स्टील उनमें से एक है।


इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, इस फैसले के बाद स्टील टायकून लक्ष्मी मित्तल अपनी ग्लोबल कंपनी आर्सेलर मित्तल की एंट्री इंडिया में करा सकती है। आर्सेलर मित्तल, एस्सार स्टील की कुछ कंपनियां खरीदना चाहते थे लेकिन तब के नियम के मुताबिक, उन्हें कंपनी का पुराना बकाया चुकाना पड़ता। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आर्सेलर मित्तल को राहत मिली है।


इस फैसले के गुढ़ मायने?


सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के उस फैसले को खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि दिवालिया कंपनियों से मिली रकम पर फाइनेंशियल और ऑपरेशनल क्रेडिटर्स की बराबर की हिस्सेदारी होगी।


NCLAT के इस फैसले के बाद फाइनेंशियल क्रेडिटर्स ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का कहना था कि NCLAT के इस फैसले से IBC के मामले बढ़ सकते हैं।


फाइनेंशियल क्रेडिटर्स की यह भी दलील थी कि सिक्योर्ड क्रेडिटर्स का फंड पर पहला अधिकार है। हालांकि अब
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि फाइनेंशियल क्रेडिटर्स का पहला हक है। इससे दिवालिया कंपनियों के फंड के बंटवारे को लेकर जो विवाद था वह खत्म हो गया। 


IBC रेज्योलूशन तेज


कानूनी झमेलों की वजह से दिवालिया कंपनियों को रेज्योलूशन में वक्त लगता है। इसकी एक बड़ी वजह है कि ऑपरेशनल क्रेडिटर्स फंड के बंटवारे को लेकर नाखुश रहते हैं। उनका पक्ष रहता है कि उन्हें लोन में ज्यादा हेयरकट लेना पड़ता है। हेयरकट के मायने इंटरेस्ट में छूट से है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले फंड बंटवारे की मुश्किल खत्म हो गई है।


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।