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स्विस बैंक में भारतीयों के 10 खातों का कोई दावेदार नहीं, जानिए कहां जाएगी इन खातों की रकम

स्विस अथॉरिटी के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले 4 साल के दौरान इनमें से एक भी खाते पर किसी भारतीय के "वारिस" ने सफलतापूर्वक दावा नहीं किया है
अपडेटेड Nov 12, 2019 पर 12:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

स्विट्जरलैंड ने 4 साल पहले भारतीयों के निष्क्रिय खातों की डिटेल जुटाना शुरू किया था। 4 साल के बावजूद ऐसे एक दर्जन से ज्यादा अकाउंट हैं जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। ऐसे में आशंका यह है कि स्विट्जरलैंड के बैंक इन खातों का पैसा वहां की सरकार को ट्रांसफर कर सकते हैं।


स्विट्जरलैंड सरकार ने 2015 में निष्क्रिय खातों के ब्योरे को सार्वजनिक करना शुरू किया था। इसके तहत इन खातों के दावेदारों को कुछ प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा गया था। हालांकि कुछ खाताधारकों ने कोई प्रमाण नहीं दिया। ऐसे 10 खाते भारतीयों के हैं।


स्विस अथॉरिटी के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले 4 साल के दौरान इनमें से एक भी खाते पर किसी भारतीय के "वारिस" ने सफलतापूर्वक दावा नहीं किया है।


इनमें से कुछ खातों के लिए दावा करने की अवधि अगले महीने समाप्त हो जाएगी। वहीं कुछ अन्य खातों पर 2020 के अंत तक दावा किया जा सकता है।


दिलचस्प यह है कि निष्क्रिय खातों में से पाकिस्तानी निवासियों से संबंधित कुछ खातों पर दावा किया गया है। इसके अलावा खुद स्विट्जरलैंड सहित कुछ और देशों के निवासियों के खातों पर भी दावा किया गया है।


दिसंबर, 2015 में पहली बार ऐसे खातों को सार्वजनिक किया गया है। सूची में करीब 2,600 खाते हैं जिनमें 4.5 करोड़ स्विस फ्रैंक या करीब 300 करोड़ रुपये की राशि पड़ी है। 1955 से इस राशि पर दावा नहीं किया गया है। सूची को पहली बार सार्वजनिक किए जाते समय करीब 80 सुरक्षा जमा बॉक्स थे। स्विस बैंकिंग कानून के तहत इस सूची में हर साल नए खाते जुड़ रहे हैं। अब इस सूची में खातों की संख्या करीब 3,500 हो गई है।


स्विस बैंक खाते पिछले कई साल से भारत में राजनीतिक बहस का विषय हैं। माना जाता है कि भारतीयों द्वारा स्विट्जरलैंड के बैंकों में अपने बेहिसाबी धन को रखा जाता है। ऐसे भी संदेह जताया जाता रहा है कि पहले की रियासतों की ओर से भी स्विट्जरलैंड के बैंक खातों में धन रखा जाता था।


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