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NSE को-लोकेशन मामले में SEBI को तगड़ा झटका, SAT ने 6000 करोड़ रुपये डिपोजिट पर 5 साल से लगी रोक हटाई

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को-लोकेशन मामले में स्टॉक मार्केट रेगुलेटर SEBI को इसकी अपीलेट बॉडी सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल से तगड़ा झटका लगा है
अपडेटेड May 23, 2021 पर 16:29  |  स्रोत : Moneycontrol.com

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को-लोकेशन मामले (NSE co-location case) में स्टॉक मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) को इसकी अपीलेट बॉडी सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) से तगड़ा झटका लगा है। SAT ने NSE के को-लोकेशन मामले में 6000 करोड़ रुपए की डिपॉजिट पर पिछले 5 साल से लगी रोक हटा दी है। SAT ने कहा कि NSE इस पैसे का उपयोग कर सकता है।

SAT ने इसी सप्ताह अपने ऑर्डर में कहा कि NSE पिछले 5 साल से Escrow Account से पड़ा हुए 6000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल अपने बिजनेस को बढ़ाने में कर सकती है। हालांकि, SAT ने कहा कि NSE को इसमें से 420 करोड़ रुपये एक इंटरेस्ट बियरिंग अकाउंट में जमा करना होगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून, 2021 को होगी। 

NSE को-लोकेशन फैसिलिटी स्टॉक ब्रोकरों को किराए पर रैक लेने और एक्सचेंज परिसर के अंदर अपने सर्वर और सिस्टम को लोकेट करना की सुविधा देता है, ताकि स्सॉक ब्रोकर्स को डायरेक्ट मार्केट एक्सेस के लिए एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम के साथ कनेक्टिविटी में कोई परेशानी नहीं हो। NSE इस सर्विस के बदले स्टॉक ब्रोकर्स से चार्ज लेता है।

आपको बता दें कि सितंबर 2016 में SEBI ने NSE से कहा था कि वह को-लोकेशन के जरिये हासिल किए गए 6000 करोड़ रुपये को एक अलग अकाउंट (Escrow Account) में जमा कराए। SEBI ने NSE पर इस फंड का उपयोग करने पर रोक लगा दी थी।31 मार्च 2021 तक यह रकम 6,085 करोड़ रुपये थी। SAT ने मार्च 2020 में इस मामले को रिजर्व रखा था और उसके बाद कोरोना शुरू हो गया था। इसकी वजह से ट्रिब्यूनल का फंक्शन रुक गया था।

इसके अलावा वर्ष 2019 में SEBI ने NSE के खिलाफ एक ऑर्डर पास किया था।  इसमें कहा गया कि NSE 625 करोड़ रुपए जमा कराए। इसके खिलाफ भी NSE ने SAT में अपील की है। हालांकि इस पर अभी कोई फैसला नहीं आया है।

NSE को वित्त वर्ष 2021 में 4,464 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ है जो एक साल पहले की तुलना में 76% ज्यादा है। NSE ने कहा कि SEBI ने जो पैसे अटका रखे हैं, उसकी वजह से वह डिविडेंड नहीं दे पा रहा है। यदि SAT इस पर से रोक हटाता है तो वह डिविडेंड देने के बारे में सोच सकता है।

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