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RBI ने हलफनामे में किया खुलासा, कैसे PMC बैंक ने RBI को 'धोखा' दिया

RBI ने इस हलफनामे में बताया है कि कैसे PMC बैंक ने जांच के दौरान उसकी आंखों में धूल झोंका है
अपडेटेड Nov 21, 2019 पर 08:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

PMC Crisis। बॉम्बे हाई कोर्ट में मंगलवार को एक विस्तृत एफिडेविट जमा किया गया। इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने स्वीकार किया कि पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC) ने उसे "धोखा" दिया है। यह एफिडेविट राजलक्ष्मी सेठी ने जमा किया है। सेठी RBI के डिपार्टमेंट ऑफ कोऑपरेटिव सुपरविजन के असिस्टेंट जनरल मैनेजर हैं। इस एफिडेविट के जरिए RBI ने बताया है कि PMC बैंक ने RBI के सैंपल चेक के दौरान डाटा में गड़बड़ी की थी। एफिडेविट में बताया गया है, "RBI ने जांच के लिए जो सैंपल लिया था उसमें HDIL के अनडिस्क्लोज खातों का जिक्र नहीं था।"


PMC बैंक ने HDIL के जिन खातों की जानकारी RBI की इंसपेक्शन टीम को दी थी, उनमें से ज्यादातर नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स थे। RBI ने यह भी बताया है कि बैंक के चेयरमैन जब वारयाम सिंह थे तब HDIL की पूर्ण सहयोगी सब्सिडियरी कंपनी के कर्ज की सीमा भी बढ़ाई गई थी। PMC बैंक से के चेयरमैन रहते हुए वारयाम सिंह HDIL के डायरेक्टर भी थे। यानी जुलाई 2010 से लेकर जुलाई 2012 के बीच RBI के मास्टर सर्कुलर का उल्लंघन और हितों का टकराव हुआ।


वारयाम सिंह PMC बैंक के बोर्ड मीटिंग उस कंपनी को मॉरगेज ओवरड्राफ्ट करने की अनुमति थे जिसमें उनका अपना हित था। यह भी RBI के नियमों के खिलाफ है।


कैसे हुआ खुलासा?


RBI की जांच टीम ने वारयाम सिंह और HDIL के प्रमोटर्स-डायरेक्टर्स के बीच संबंधों का पता लगाया। फिलहाल ये लोग गिरफ्तार हैं।


19 सितंबर 2019 को RBI ने एक एनुअल फाइनेंशियल इंसपेक्शन टीम PMC बैंक में भेजा। HDIL के खातों की जांच, खासतौर पर डीलिंग और कर्ज पर फोकस किया गया। यह जांच 2 नवंबर 2019 को पूरी हुई है। एफिडेविट में बताया गया है कि अभी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।


शुरुआती जांच में पता चला है कि कई वित्तीय अनियमितताओं के कारण PMC बैंक का नेटवर्थ नेगेटिव हो गया। इस दौरान डिपॉजिट में काफी कमी आई है।


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