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Rcom की बैंकरप्सी प्रक्रिया शुरु, कंपनी पर 5000 करोड़ का कर्ज

प्रकाशित Thu, 09, 2019 पर 18:32  |  स्रोत : Moneycontrol.com

संकट से जूझ रही रिलायंस कम्युनिकेशंस यानी आरकॉम की बैंकरप्सी की प्रक्रिया शुरु हो गई है। साथ ही एनसीएलटी ने मुकदमेबाजी के 357 दिनों की इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया की अवधि से बाहर रखने को भी मंजूरी दे दी है। आरकॉम अनिल अंबानी समूह की पहली कंपनी है जिसे बैंकरप्ट(दीवालिया) घोषित किया गया है। कंपनी पर बैंकों का 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज बकाया है।


नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी ने गुरुवार को कंपनी के बोर्ड को भंग कर दिया है। उसके ऑपरेटिंग के लिए नए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल्स की नियुक्ति की है। इसके अलावा एसबीआई की अगुवाई वाले 31 बैंकों के कंर्सोर्टियम को क्रेडिटर्स की समिति यानी सीओसी बनाने की मंजूरी दे दी है।


सुनवाई के दौरान कंपनी ने रिजोल्यूशन प्रोफेशनल के जरिए 30 मई 2018 से 30 अप्रैल 2019 के समय तक यानी 357 दिन की बैंकरप्सी प्रक्रिया में मोहलत मांगी है। कंपनी का कहना है कि इस टाइम पीरियड के लिए अपीलेट ट्रिब्यनल और सुप्रीम कोर्ट से उसके पास स्टे है। 


संकट में फंसी आरकॉम को करीब दो साल पहले अपना ऑपरेशन बंद करना पड़ा था। कंपनी ने रिलायंस जियो को स्पेक्ट्रम में बैंकरप्सी प्रक्रिया से बचने की भरसक कोशिश की। लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया और सरकार की ओर से मंजूरियों में देरी से होने इसमें अड़चनें आईं।



इसके अलावा कंपनी सार्वजनिक रूप से रियल एस्टेट और स्पेक्ट्रम संपत्तियों के मोनिटाइजेशन के जरिए बैंकों का पैसा लौटाने के सार्वजनिक तौर पर किए गए वादे को भी पूरा नहीं कर पाई।


आपको बता दें कि पिछले माह कंपनी के चेयरमैन अनिल अंबानी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में संभावित रूप से जेल जाने से बचे । उनके बड़े भाई मुकेश अंबानी ने अंतिम समय में उन्हें 480 करोड़ रुपये की सहायता देकर जेल जाने से बचा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने आरकॉम को यह राशि एरिक्सन को चुकाने का निर्देश दिया था। एरिक्सन ने पिछले साल आरकॉम को एनसीएलटी में घसीटा था। वह उसकी ऑपरेशनल क्रेडिटर है।