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Reliance-Aramco डील में इस वजह से हो रही है देरी, जानिए क्यों क्रूड प्राइस 65 डॉलर हुआ तो डील होगी मुमकिन

इंवेस्टमेंट फर्म ने कहा कि सऊदी अरामको अभी भी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साथ उसके O2C कंपनी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने को लेकर बातचीत कर रही है
अपडेटेड Mar 27, 2021 पर 11:32  |  स्रोत : Moneycontrol.com

दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी कंपनी सऊदी आरामको (Saudi Aramco) और भारत से सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries- RIL) के बीच प्रस्तावित डील अगस्त 2019 से ही अटकी हुई है। ग्लोबल इंवेस्टमेंट और ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने उम्मीद जताई कि जब कच्चे तेल (Crude oil) की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल के पास स्थिर हो जाएगी, तब Saudi Aramco रिलायंस इंडस्ट्रीज के ऑयल टू केमिकल बिजनेस (O2C) में 20% हिस्सेदारी खरीद सकती है।

Jefferies के साथ एक और इंवेस्टमेंट फर्म मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने कहा कि सऊदी अरामको अभी भी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के साथ उसके O2C कंपनी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने को लेकर बातचीत कर रही है। इंवेस्टमेंट फर्म ने कहा, कोरोना वायरस महामारी के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें गिरने और सऊदी अरामको द्वारा अपने शेयरहोल्डर्स को सालाना 75 बिलियन डॉलर डिविडेंड देने की घोषणा के कारण Reliance-Aramco Deal अटकी हुई है।

Jefferies ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि Aramco भारत और चीन में डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट पर फोकस कर रही है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि Aramco के IPO प्रोस्पेक्टस से इस बात का जिक्र है कि कंपनी भारत जैसे हाई-ग्रोथ इकोनॉमी में डाउनस्ट्रीम इंवेस्टमेंट की इच्छुक है। आपको बता दें कि चीन के सबसे बड़े O2C प्रोजेक्ट में Aramco की हिस्सेदारी है। ऐसे में कंपनी भारत मे भी अपने पांव पसारना चाहती है।

आपको बता दें कि उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) ने अगस्त 2019 में दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक कंपनी सऊदी अरामको को O2C बिजनेस में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचे जाने की घोषणा की थी। इसमें गुजरात के जामनगर में दो रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल ऐसेट्स शामिल हैं। यह डील मार्च 2020 तक पूरा होना था, लेकिन इसमें देरी हुई।

दोनों कंपनियों के बीच प्रस्तावित डील में रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल प्लांट के अलावा ओ2सी कारोबार में फ्यूल के रिटेल बिजनेस में 51% हिस्सेदारी भी शामिल है। हालांकि, इस सौदे में केजी-डी6 ब्लॉक में स्थित तेल और गैस उत्पादन संपत्तियां शामिल नहीं हैं। RIL ने 2019 में अपने O2C बिजनेस का वैल्यूएशन 75 अरब डॉलर आंका था।

सऊदी अरामको के नेट प्रॉफिट में भारी गिरावट आई है। कंपनी को साल 2019 में जितनी कमाई हुई थी, उसकी तुलना में पिछले साल 45 फीसदी का नुकसान हुआ है। साथ ही अरामको ने कंपनी के शेयर धारकों को 75 अरब डॉलर के बराबर डिविडेंड देने की घोषणा की है।


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