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सत्यम मामले में SEBI को झटका, SAT ने PWC पर लगी रोक को किया खारिज

SAT ने कहा है कि इस मामले में केवल ICAI ही अपने सदस्यों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई कर सकता है।
अपडेटेड Sep 10, 2019 पर 17:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

SEBI ने PWC पर दो साल तक किसी भी कंपनी का ऑडिट करने पर रोक लगाने का आदेश दिया था। अब Securities Appellate Tribunal (SAT) ने सेबी के इस आदेश को खारिज कर दिया है। इससे सेबी को SAT से तगड़ा झटका लगा है। हालांकि SAT ने ऑडिट कंपनी PWC से आंशिक तौर पर 13 करोड़ लौटाने की मंजूरी दे दी है।


SAT ने अपने आदेश में कहा है कि सेबी को आडिट की गुणवत्ता को देखने और जांचने का कोई अधिकार नहीं है। सेबी केवल उपचारात्मक (Remedial) और बचाव (preventive) वाली कार्रवाई कर सकता है। PWC पर जारी किए गए निर्देश न तो उपचारात्मक है और न ही बचाव वाला बल्कि उसने दंडात्मक कार्रवाई की है।


दरअसल सेबी ने साल 2018 में PWC के खिलाफ एक आदेश जारी किया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि ऑडिट फर्म ने घोटालेबाज सत्यम के साथ एक समझौता किया था। इस आदेश से PWC फर्मों को दो साल के लिए किसी भी लिस्टेड कंपनी का ऑडिट करने से रोक लग गई थी।


PWC पर लगे प्रतिबंध को हटाते हुए SAT ने कहा है कि केवल Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) ही अपने सदस्यों के खिलाफ कोई भी कार्रवाई कर सकता है। और ऑडिटिंग में ढिलाई बरतने के आधार पर धोखाधड़ी साबित नहीं की जा सकती। हालांकि SAT ने ये भी कहा है कि काम ठीक ढंग से नहीं करने को लेकर PWC को दी गई 13 करोड़ रुपये की फीस को ब्याज सहित वापस लिया जा सकता है।


बता दें कि साल 2009 में सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज के चेयरमैन बी. रामलिंग राजू ने सार्वजनिक रूप से कंपनी में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की बात स्वीकर की थी। इसके बाद सरकार ने सत्यम बोर्ड को भंग करके इसकी बिक्री प्रकिया शुरु की। जिसे बाद में टेक महिंद्रा ने अधिग्रहण कर लिया।


सत्यम घोटाला-कब क्या हुआ?


सत्यम के खातों में 7,800 करोड़ की हेराफेरी हुई थी जिसे सत्यम घोटाला नाम दिया गया था। 2009 में सत्यम घोटाला सामने आया था। सत्यम कंप्यूटर के चेयरमैन रामालिंगा राजू ने खातों में करीब 8 हजार करोड़ की हेराफेरी की बात मानी थी।


 


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