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SC ने AGR पर टेलीकॉम कंपनियों की याचिका खारिज की, एक हफ्ते में देना होगा 1 लाख करोड़ रुपए

निराश भारती एयरटेल ने कहा, फैसले के खिलाफ क्यूरेटिव पीटिशन दायर करने की तैयारी
अपडेटेड Jan 17, 2020 पर 09:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) की AGR (एडजस्टेड ग्रॉस रेवन्यू) पर दायर याचिका खारिज कर दी। AGR को लेकर सरकार और टेलीकॉम कंपनियों के बीच पिछले 14 साल से विवाद चल रहा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए टेलीकॉम कंपनियों को 92,000 करोड़ रुपए देने को कहा था। कंपनियों को जनवरी के अंत तक बकाया रकम चुकाना होगा।


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ एयरटेल और वोडाफोन-आईडिया ने याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की एक तीन सदस्यीय बेंच ने AGR को परिभाषित किया। AGR की यही परिभाषा टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने दी है। AGR के मायने लाइसेंस होल्डर कंपनी की कुल आमदनी जिसमें रेंट, डिविडेंड और इंटरेस्ट इनकम जैसे नॉन-कोर टेलीकॉम ऑपरेशंस भी शामिल है। लाइसेंस फीस और स्पेक्ट्रम चार्ज के लिए AGR को बेस माना जाता है।


सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया निराश है। फैसला आने के बाद एयरटेल ने कहा है कि वह क्यूरेटिव पीटिशन दायर करने की संभावना तलाश रही है।


क्या कहना है भारती एयरटेल का?


भारती एयरटेल ने कहा है, "सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए हम कहना चाहेंगे कि इस फैसले से हम निराश हैं। हम मान रहे थे कि AGR की परिभाषा पर हमारा विरोध जायज है। इंडस्ट्री वित्तीय संकट से जूझ रही है और इसके नतीजे सेक्टर के लिए और बुरे हो सकते हैं।"


एयरटेल ने कहा कि इंडस्ट्री को फिलहाल नेटवर्क बढ़ाने, स्पेक्ट्रम खरीदने और 5G जैसी नई तकनीकों पर खर्च करने की जरूरत थी। यह पैसा AGR के बकाया रकम पर इंटरेस्ट, पेनाल्टी और पेनाल्टी पर इंटरेस्ट देने पर चला जाएगा। AGR की रकम का 75 फीसदी हिस्सेदारी इन्हीं चीजों की है। एयरटेल ने कहा, हम इस मामले में क्यूरेटिव पीटिशन दायर करने की संभावना तलाश रहे हैं। 


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