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नीलेकणी के बयान पर सेबी चीफ ने कहा, 'Infosys की जांच चलती रहेगी, बाकी आप भगवान से पूछ सकते हैं'

दो दिन पहले ही नीलेकणी ने कड़े शब्दों में Infosys को सपोर्ट करते हुए कहा था, "कंपनी के नंबर भगवान भी चेंज नहीं कर सकते"
अपडेटेड Nov 09, 2019 पर 15:27  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Infosys के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने दो दिन पहले कंपनी के बहीखातों को लेकर कहा था कि "भगवान भी इंफोसिस के नंबर बदल नहीं सकते हैं।" अब मार्केट रेगुलेटर सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने शुक्रवार को कहा कि कंपनी के खिलाफ व्हिसलब्लोअर की शिकायत की जांच रेगुलेटर अभी भी कर रहा है।


त्यागी ने कहा, "निवेशक अगर चाहें तो इंफोसिस के बयान से राहत की सांस ले सकते हैं लेकिन हमारी जांच चलती रहेगी। मैं आपसे इतना ही कह सकता हूं।"


इससे पहले बुधवार को नीलेकणी ने इंफोसिस के सपोर्ट में कड़े शब्दों में कहा था, "भगवान भी कंपनी के नंबर चेंज नहीं कर सकते हैं। इन आरोपों से मेरी फाइनेंस टीम अपमानित महसूस कर रही है।ल लेकिन मैं जांच को लेकर भी पक्षपाती नहीं हूं।"


त्यागी ने कहा, "आपको नीलेकणी से पूछना होगा या आप भगवान से पूछ सकते हैं।"


क्या है पूरी कहानी?


कंपनी के कुछ गुमनाम कर्मचारियों ने "Ethical Employess" के नाम से 20 सितंबर को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को दो पेज का लेटर भेजा था, जो कि Deccan Chronical ने अपनी वेबसाइट पर छापा है। इस लेटर में लिखा है, "पारेख और रॉय पिछली कई तिमाहियों से कंपनी में कुछ गड़बड़ी कर रहे हैं। इसके सबूत में उनके ईमेल और वॉयस रिकॉर्डिंग भेजा जा रहा है।"


हालांकि इस लेटर का बोर्ड की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद एक गुमनाम व्हिसलब्लोअर ने एथिकल एंप्लॉयीज की तरफ से 3 अक्टूबर को अमेरिका के व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन प्रोग्राम को लेटर लिखकर बताया कि अप्रैल 2019 से सितंबर 2019 तिमाही तक इंफोसिस की बैलेंसशीट्स में अकाउंटिंग से जुड़ी गड़बड़ियां की गई हैं।


व्हिसलब्लोअर के लेटर में लिखा गया है, "पिछली तिमाही (जुलाई-सितंबर) में हमें कहा गया है कि वीजा कॉस्ट को पूरी तरह ना जोड़ा जाए ताकि कंपनी का प्रॉफिट बेहतर दिखे। हमने इस बातचीत की वॉइस रिकॉर्डिंग भी कर ली है। फिस्कल ईयर 2019-20 में तिमाही नतीजों के दौरान हमपर इस बात का दबाव बनाया गया था कि 5 करोड़ डॉलर के अपफ्रंट पेमेंट के लौटाने का जिक्र ना किया जाए। ऐसा होने से कंपनी का प्रॉफिट कम दिखेगा और इसका असर शेयर प्राइस पर पड़ेगा।"


"ऑडिटर्स और कंपनी के बोर्ड से अहम जानकारियां छिपाई गईं। वेरिजॉन, इंटेल और जापान में JV जैसे जो बड़े डील हुए हैं उनमें रेवेन्यू का मामला अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के मुताबिक नहीं था। कर्मचारियों को निर्देश दिया गया था कि वो ऑडिटर्स को बड़े डील की जानकारी ना दें। CEO रिव्यू और अप्रूवल्स की अनदेखी कर रहे हैं और उन्हें सेल्स टीम को निर्देश दे रहे हैं कि वो अप्रूवल के लिए मेल ना करें। वह उन्हें मार्जिन के लिए गलत अनुमान लगाने को कह रहे हैं।"


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