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जेपी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने NBCC से पूछा, क्या जेपी की अधूरी परियोजनाओं में दिलचस्पी है?

बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 5 सितंबर तय की है
अपडेटेड Sep 04, 2019 पर 09:07  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने 3 सितंबर को सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC को दो दिनों में यह बताने को कहा कि क्या वह जेपी ग्रुप की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए रिवाइज प्रपोजल जमा करना चाहता है।


एएम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी की एक बेंच ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को नोटिस जारी किया है। केंद्र सरकार ने कहा कि अगर NBCC रियल एस्टेट कंपनी जेपी की अधूरी परियोजनाओं का अधिग्रहण करती है तो वह टैक्स माफ कर देगी। यह टैक्स करोड़ों रुपए में है।


बेंच ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 5 सितंबर तय की है। अभी तक दो राउंड की बीडिंग हो गई है।


एडिशनल सॉलिसिटर जनरल माधवी दिवान ने कहा है कि सरकार ने शेयरहोल्डर्स के साथ तीन बैठक की है। केंद्र सरकार जेपी ग्रुप को टैक्स में छूट देना चाहता है। इसके साथ ही वह किसानों का मुआवजा बढ़ाना चाहता है। सरकार चाहती है कि NBCC अधूरी परियोजनाओं को पूरा करे।


 जेपी ग्रुप ने कोर्ट को कहा कि उसे भी जपी इंफ्राटेक को रिवाइव करने का मौका देना चाहिए। वह बैंकों का बकाया चुकाना चाहती है। कंपनी ने तीन साल के भीतर अपनी सभी 27 प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का वादा भी किया है।


कोर्ट ने हालांकि कहा कि वह सबसे पहले NBCC के प्रपोजल को देखेगी, उसके बाद वह जेपी के फ्रेश प्रपोजल पर गौर करेगी।


22 अगस्त को कोर्ट ने फैसले की यथास्थिति एक हफ्ते के लिए बरकरार रखा था। जेपी ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्राइब्यूनल (NCLAT) के उस आदेश को चुनौती दी है जिसके तहत जेपी इंफ्राटेक के लिए फ्रेश बोली लगाने पर रोक लगा दी गई है। NCLAT ने पेरेंट कंपनी-जेपी एसोसिएट पर बोली लगाने से रोक लगा दी है।


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