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सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप की सभी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल किया, बिकेगी पूरी प्रॉपर्ट

इसके साथ ही ED को ग्रुप के खिलाफ सख्ती से जांच करने का आदेश दिया है ताकि यह पता चले कि कंपनी ने होम बायर्स का पैसा क्या किया
अपडेटेड Jul 23, 2019 पर 11:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ और ग्राहकों के हित में फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप की सभी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट को ग्रुप के खिलाफ सख्ती से जांच करने का आदेश दिया है ताकि यह पता चले कि कंपनी ने होम बायर्स का पैसा क्या किया।


जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की अगुवाई वाले सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने अपना फैसला सुनाया है। इस बेंच ने नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को यह निर्देश दिया है कि वह नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अधूरी परियोजनाओं को पूरा करे और उसे होमबायर्स को सौंपे।


मई में सुप्रीम कोर्ट को यह पता चला था कि आम्रपाली ग्रुप ने होमबायर्स को धोखा देकर फर्स्ट डिग्री का क्राइम किया है। कोर्ट ने कहा था कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे चाहे जितने भी ताकतवर लोग होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रुप और इसके डायरेक्टर्स फॉरेंसिक ऑडिटर्स की रिपोर्ट के खिलाफ अपना पक्ष रखना चाहते थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बात नहीं सुनी।


सुप्रीम कोर्ट उन होमबायर्स की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिन्हें अभी फ्लैट का पजेशन नहीं मिल पाया है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए दो ऑडिटर नियुक्त किए थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट 2 मई को सौंपे थे। रिपोर्ट के मुताबिक आम्रपाली ग्रुप ने होमबायर्स के 3500 करोड़ रुपए डायवर्ट किए हैं।


आरोप है कि आम्रपाली ग्रुप ने न सिर्फ होमबायर्स बल्कि बैंक और अथॉरिटी को भी चूना लगाया है। फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट में पता चला है कि कंपनी डेट रिकवरी ट्राइब्यूनल से बचने के लिए गुटबंदी में भी शामिल है। कंपनी नहीं चाहती थी कि उसकी प्रॉपर्टी की नीलामी हो।