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ये स्टार्टअप कंपनी दे रही है 1 रुपये में 1 GB डेटा, जानिए पूरी तकनीकी

जो यूजर्स बेहत सर्विस चाहते हैं वो उसी तरह से डेटा खरीद सकते हैं जैसे ब्रॉडबैंड कनेक्शन पर अपने FUP को टॉप-अप करेंगे। फिलहाल वाईफाई डब्बा 1 रुपये में 1 GB डेटा दे रहा है।
अपडेटेड Jan 23, 2020 पर 10:21  |  स्रोत : Moneycontrol.com

देश में मोबाइल का प्रटलन बढ़ने के बाद इंटरनेट को बढ़ावा देने में जियो का अहम योगदान माना जाता है। शुरुआती दौर में फ्री में डेटा मुहैया कराने वाली जियो को लोगों ने हाथों हाथ लिया। लेकिन अब पूरी दुनिया के मुकाबले भारत में डेटा प्लान सबसे सस्ता हो सकता है। इसकी तैयारी कर रही हैं बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी Wifi Dabba (वाईफाई डब्बा)। ये कंपनी विश्वसनीय और सस्ती सर्विस के साथ कनेक्टिविटी की समस्या को खत्म करना चाहती है। जिसे supernodes (सुपरनोड्स) कहा जाता है।


शुरुआत


दरअसल फरवरी 2016 में बेंगलुरु में एक स्टार्टअप कंपनी साइबर की दुनिया में उतर गई। इसका मकसद सस्ता इंटरनेट कनेक्शन महैया कराना था। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक जब कंपनी ने इस सेक्टर में अपनी सर्विस देनी शुरू की, तब उसने पाया कि कनेक्टिविटी और मूल्य निर्धारण सबसे बड़ समस्या थी। इसलिए कंपनी ने ISP एग्रीगेटर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। जो कि फाइबर टेक्नोलॉजी का उपयोग करने वाले प्लेयर से कनेक्शन खरीदते हैं।


जैसे-जैसे दिन गुजरते गए कंपनी को एहसास हुआ कि असली समस्या तो फाइबर के साथ ही है। लिहाजा कंपनी ने महसूस किया कि फाइबर एक मुख्य मुद्दा है। इसलिए middle mile – Supernodes के लिए एक समाधान विकसित करने पर काम किया गया।
ब्रॉडबैंड की पहुंच आम भारतीयों तक नहीं हो पाती है। क्यों कि इसकी लागत कुछ अधिक है। सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और नेटवर्किंग इन्फ्रास्टक्चर का इस्तेमाल होने के चलते इसकी लागत बढ़ जाती है। फाइबर को बिछाने में अधिक खर्च आता है। जिससे उसकी लागत और अधिक बढ़ जाती है। 


जानिए वाईफाई डब्बा क्यों है सबसे सस्ता डेटा


दरअसल वाईफाई डब्बा थर्ट पार्टी, सॉफ्टटवेयर, हार्डवेयर या इन्फ्रास्टक्चर के भरोसे नहीं है। इसकी जगह कंपनी ने खुद ही अपना नेटवर्क विकसित किया है। यह कंपनी वेंडर मार्जिन जैसे बहुत सी चीजों की सेविंग करती है।


यह सुपरनोड्स टेक्नोलॉजी सच में डेटा संचारित करने का एक नया तरीका है। सुपरनोड्स अनिवार्य रूप से आईसेफ लेजर है। इससे सड़कों को खोदने और उस पर फाइबर बिछाने का खर्च बच जाता है। जब वाईफाई सिग्नल संचारित करते हैं तो सुपरनॉड्स वाईफाई डब्बा राउटर से कनेक्ट रहते हैं। कोई भी यूजर अपने मोबाइल नंबर और OTP के साथ वाईफाई सिग्नल से जुड़ सकता है। इसकी लागत बहुत ही कम है। कुल मिलाकर ये काफी सस्ता है।  


हालांकि जो यूजर्स बेहत सर्विस चाहते हैं वो उसी तरह से डेटा खरीद सकते हैं जैसे ब्रॉडबैंड कनेक्शन पर अपने FUP को टॉप-अप करेंगे। फिलहाल वाईफाई डब्बा 1 रुपये में 1 GB डेटा दे रहा है। 


वाईफाई डब्बा एक इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी है। जो फाइबर ऑप्टिक्स के जरिए इंटरनेट मुहैया कराती है। ये राउटर्स को किराना स्टोर पर लगाते हैं। कंपनी के मुताबिक, 100-200 मीटिर के रेडियस में 50 Mbs की स्पीड दी जाती है। 
लेकिन अब कंपनी सस्ता डेटा मुहैया कराने के लिए लेजर (Laser) का इस्तेमाल करती है। 


सुपनॉड्स आईसेफ लेजर का उपयोग करके काम करते हैं। ये एक ऐसी टेक्नलॉजी है जो बिना किसी देरी के 2 किमी तक काम कर सकती है। कंपनी का दावा है कि इसे जोड़कर वो 100Gbps तक की स्पीड पा सकते हैं।


हर एक सुपरनोड विभिन्न स्विचों से जुड़ा होता है, जो घरों में वाईफाई राउटर को bandwidth वितरित करते हैं। साथ ही ये राउटर भी इन-हाउस डिजाइन किए गए हैं और डुअल-बैंड कनेक्टिविटी के साथ आते हैं।


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