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डूब सकती है टाइटेनिक बनाने वाली कंपनी, जानिए क्या है कारण...

158 साल पुरानी टाइटेनिक बनाने वाली कंपनी हार्लेंड एंड वोल्फ शिपयार्ड बंद होने के करीब पहुंच गई है।
अपडेटेड Aug 06, 2019 पर 12:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

टाइटेनिक बनाने वाली कंपनी हार्लेंड एंड वोल्फ शिपयार्ड कंपनी बंद होने के कगार पर पहुंच गई है। तकरीबन 158 साल पुरानी इस कंपनी में आज से 100 साल पहले 35 हजार से अधिक लोग काम करते थे। पिछले कई सालों से लगातार घाटे में चल रही कंपनी अब दीवालिया हो गई है। अब इस समय कंपनी के पास 123 लोग कर्मचारी बचे हैं।
हार्लेंड एंड वोल्फ शिपयार्ड ने साल 1909 से 1911 के बीच टाइटेनिक जहाज बनाया था। इसे उत्तरी आयलैंड के बेलफास्ट में 31 मार्च 1911 को लॉन्च किया गया था। कंपनी ने टाइटेनिक जहाज के अलावा तकरीबन 150 युद्धपोत बनाए थे। साल 1945 के बाद कंपनी ने जहाज निर्माण से दूर होती गई। बंद होने से पहले कंपनी पनबिजली और समुद्री इंजीनियरिंग परियोजनाओं पर काम करही थी।




हार्लेंड और वोल्फ कंपनी का बनाया गया टाइटेनिक जहाज साल 1912 में अपनी पहली यात्रा में आइसबर्ग से टकराकर समुद्र में डूब गया था। समुद्री इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना थी। इस दुर्घटना में 1,517 लोग मारे गए थे। जहाज सुथेम्पटन से न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ था।



एक सितंबर 1985 को अमेरिकी नौसेना के पूर्व कमांडर और महासागर विज्ञान के प्रोफेसर रॉबर्ट डुआने बालार्ड ने जहाज का मलबा खोजा था। जहाज में 2,229 लोग सवार थे लेकिन कम लाइफबोट होने के कारण कुछ ही लोगों की जान बच पाई थी। टाइटैनिक उस समय के सबसे अनुभवी इंजीनियरों के द्वारा डिजाइन किया गया था और इसके निर्माण में उस समय में उपलब्ध आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन हैरीनी की बात य़े हैं कि उनमें से एक स्मोकस्टेक महज डेकोरेटिव पीस था, वो काम नहीं करता था। उसे केवल सजावट के लिए लगाया गया था।


शुरु में जहाज की स्थिति को गुप्त रखने की योजना बनाई गई थी, ताकि कोई भी इस जगह का पता नहीं लगा सके, जिसे कब्रिस्तान माना जाने लगा था।