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वोडाफोन-आइडिया क्या दिवालिया हो जाएगी, प्रमोटर बिड़ला ने जताई थी आशंका

एनालिस्ट्स का कहना है, बेलआउट से भी कंपनी को बचा पाना मुश्किल है
अपडेटेड Jan 24, 2020 पर 15:28  |  स्रोत : Moneycontrol.com

AGR की बकाया रकम की वजह से टेलीकॉम कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर सरकार वोडाफोन आइडिया (Vodafone-Idea) के बेलआउट की कोशिश करती है तो भी मुश्किल में फंसी यह कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम और भारती एयरटेल को टक्कर नहीं दे सकती है।


इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, डॉएच बैंक ने अपने एक नोट में लिखा है, "सरकार के लिए कंपनी को राहत देना बहुत महंगा साबित होगा।" डॉएच बैंक ने कहा, " मुमकिन है कि आदित्य  बिड़ला ग्रुप (वोडाफोन आइडिया के प्रमोटर्स में एक) वोडाफोन आइडिया को दिवालिया होने दे और फिर इस बिजनेस में कुछ हिस्सेदारी ले सकते हैं।"


बैंक ने कहा, इस मामले को लेकर काफी "अस्पष्टता" है कि सरकार रेगुलेटरी बंदिशों के कारण प्रमोटर्स को उनके दिवालिया बिजनेस में हिस्सेदारी लेने देगी या नहीं, वह भी तब जब उन्होंने खुद अपने बिजनेस को दिवालिया होने दिया। इन बातों को लेकर कोई क्लियर रूल नहीं है।


वोडाफोन आइडिया पर AGR का कुल 53,000 करोड़ रुपए बकाया है। इसके चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा था कि बिना सरकारी या न्यायिक मदद के कंपनी बंद हो सकती है। डॉएच बैंक के मुताबिक, वोडाफोन आइडिया को रेट्स बढ़ाने होंगे। दूसरी तरफ सरकार को कंपनी की मदद के लिए आगे आना होगा। इसके साथ कंपनी की मार्केट शेयर होल्डिंग मजबूत रहेगी तभी वोडाफोन आइडिया बच पाएगी। बैंक का कहना है, "हालांकि हमारा मानना है कि इन तीन चीजों में से कंपनी को दो चीजें ही मिल पाएंगी जो उसके लिए काफी नहीं है।" 


इन हालातों में एनालिस्ट्स को लगता है कि टेलीकॉम मार्केट लीडर जियो अपना मार्केट शेयर बढ़ा सकती है। वहीं अगले 9 से 12 महीनों में बाजार में वोडाफोन आइडिया के यूजर्स एयरटेल का विकल्प चुन सकते हैं।


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