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इंडियन मार्केट से क्या निकल जाएगी वोडाफोन, जानिए क्या है मामला

कोर्ट ने लाइसेंस फीस पर जो फैसला दिया है उससे पहली छमाही में कंपनी को 1.9 अरब यूरो का लॉस हुआ है
अपडेटेड Nov 13, 2019 पर 08:46  |  स्रोत : Moneycontrol.com

Vodafone। वोडाफोन ने कहा है कि इंडिया में वह अपना कारोबार जारी रखेगी या नहीं, इसको लेकर काफी आशंकाएं हैं। कंपनी का कहना है कि सरकार ने टैक्स और चार्ज इतना ज्यादा बढ़ा दिया है कि कारोबार में बने रहना मुश्किल है। कोर्ट ने लाइसेंस फीस पर जो फैसला दिया है उससे पहली छमाही में कंपनी को 1.9 अरब यूरो का लॉस हुआ है।


वोडाफोन के चीफ एग्जिक्यूटिव निक रीड ने कहा, इंडिया में वोडाफोन में 2018 में आइडिया के साथ ज्वाइंट वेंचर बनाया था। यहां हालात लंबे समय से चुनौतीपूर्ण हैं। हालांकि इन सबके बावजूद 30 फीसदी मार्केट शेयर पर वोडाफोन की हिस्सेदारी है।


रीड ने मंगलवार को कहा, "इन रेगुलेशन की वजह से कंपनी पर बोझ बढ़ गया है। पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ऊपर से बहुत ज्यादा टैक्स की वजह से कंपनी को काफी नुकसान हो रहा है।"


राहत पैकेज की मांग


वोडाफोन सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रही है। इसके तहत स्पेक्ट्रम पेमेंट्स पर दो साल मोरोटोरियम (दो साल इंटरेस्ट चुकाने से छूट) पीरियड, लोअर लाइसेंस फीस के साथ इंटरेस्ट और टैक्स से छूट मांग रही है। कंपनी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भी छूट चाहती है जिसके तहत उसे रेगुलेटरी फीस चुकाना है।


यह पूछे जाने पर कि क्या वोडाफोन इंडियन मार्केट में बनी रहेगी। इस पर रीड ने कहा, "यह कहना ठीक है कि हालात बहुत मुश्किल हैं।" रेड ने कहा कि इंडियन मार्केट से कंपनी की वैल्यू में कोई इजाफा नहीं हो रहा है।


वोडाफोन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी है। पहली छमाही में कंपनी की ऑर्गेनिक सर्विस रेवेन्यू ग्रोथ 0.3 फीसदी रही है। दूसरी तिमाही में ग्रोथ 1.4 फीसदी रही है। 


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