वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील की शर्तों पर हस्ताक्षर -
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वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट डील की शर्तों पर हस्ताक्षर

प्रकाशित Wed, 09, 2018 पर 15:25  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी फ्लिपकार्ट को खरीद लिया है। अब किसी भी वक्त इस डील का एलान हो सकता है। ऑनलाइन सेक्टर में ये भारत की सबसे बड़ी डील है जिसकी कीमत 1 लाख करोड़ तक पहुंच रही है। अगले कुछ सालों में फ्लिपकार्ट को लिस्ट कराने की योजना है। वॉलमार्ट, फ्लिपकार्ट में 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश भी करेगी।


वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट में डील की शर्तों पर हस्ताक्षर हो गया है। वॉलमार्ट 16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी। डील के बाद सॉफ्ट बैंक, Nasper और Accel फ्लिपकार्ट से बाहर होंगे हालांकि टाइगर ग्लोबल, बिन्नी बंसल और टेनसेंट का हिस्सा बना रहेगा।


इधर सीएनबीसी-आवाज़ को एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि वॉलमार्ट और फ्लिपकार्ट के करार पर टैक्स का पेंच फंस सकता है। सूत्रों के मुताबिक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कंपनी को ईमेल भेजकर कहा है कि संपत्ति भारत में है इसलिए टैक्स की देनदारी बनती है।


उधर फ्लिपकार्ट और वॉलमार्ट डील का रिटेलर्स विरोध कर रहे हैं। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के सेक्रेटरी प्रवीण खंडेलवाल ने कहा है कि इससे छोटे कारोबारियों की कमर टूट जाएगी। ये डील देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है। छोटे कारोबारी मुकाबले में नहीं टिक पाएंगे। छोटे व्यापारियों को सरकारी सुविधा नहीं मिलती है। देश में इकॉमर्स के लिए रेगुलेटर बनना चाहिए।


उन्होंने आगे कहा कि वॉलमार्ट के आने से नियमों का उल्लंघन हो रहा है। सरकार इस तरह की डील की जांच करे। बी2बी और बी2सी के नियम कायदे  टूट रहे हैं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पहले से विवादों में घिरे हुए हैं। देश के रिटेल ट्रेड का भविष्य अंधकार में है