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आरबीआई की बात क्यों नहीं मान रहा कोटक बैंक!

प्रकाशित Tue, 23, 2019 पर 12:50  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

कोटक महिंद्रा बैंक में प्रोमोटर हिस्सेदारी घटाने को लेकर मामला अदालत में पहुंच गया है, बैंक लाइसेंस नियमों के मुताबिक कोटक बैंक में प्रोमोटर हिस्सेदारी तय समय में घटाकर 15 फीसदी तक हो जानी चाहिए लेकिन अभी तक हिस्सेदारी 29.99 फीसदी पर बनी हुई है ऐसे में कई सवाल उठते हैं कि क्या नियमों में कमजोरी इसका कारण है या फिर कुछ और, इस खास शो में इसी मुद्दे पर हो रही है बड़ी चर्चा। चर्चा के लिए सीएनबीसी-आवाज़ के साथ हैं फिनसेक लॉ एडवाइजर्स के फाउंडर संदीप पारेख, hemendra-hazari.com के हेमेंद्र हजारी और In-Govern के फाउंडर और एमडी श्रीराम सुब्रमणियन और आवाज़ के डिप्टी एक्जीक्यूटिव एडिटर नीरज बाजपेयी।


गौरतलब है कि कोटक बैंक में हिस्सेदारी घटाने के मामले में कोटक को कमजोर नियमों का फायदा मिल रहा है जिसकी वजह से आरबीआई और कोटक बैंक में टकराव बढ़ता जा रहा है। वहीं कोटक बैंक ने नियमों में कमी का फायदा उठाया है।


आरबीआआई के नियमों के तहत कोटक बैंक को प्रोमोटर हिस्सा 20 फीसदी से नीचे लाना है जबकि प्रोमोटर ने हिस्सेदारी कम करने में ढिलाई की और बार-बार समय बढ़ाने के बावजूद हिस्सेदारी कम नहीं हुई है। कोटक ने कमजोर नियमों को फायदा उठाते हुए नॉन कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर जारी करने की बात कही है। प्रेफरेंस शेयर जारी करने से कैपिटल बेस बढ़ेगा और कैपिटल बेस 953 करोड़ रुपये से बढ़कर 1453 करोड़ रुपये हो जाएगा। कैपिटल बेस बढ़ने से हिस्सेदारी एडजस्ट होकर 19.70 फीसदी हो जाएगी लेकिन इस एडस्टमेंट के बावजूद वोटिंग राइट्स में कोई फेरबदल नहीं होगा।


इस मामले में आरबीआई ने आपत्ति उठाई है, आरबीआई के अनुसार प्रोमोटर हिस्सेदारी कम करने के लिए प्रेफरेंस शेयर का तरीका गलत है। कोटक का तरीका बैंक लाइसेंस नियमों की भावना के खिलाफ भी है। आरबीआई के मुताबिक वोटिंग राइट भी कम होने चाहिए इसलिए आरबीआई कोटक के इस तरीके से सहमत नहीं और उसने कोटक के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।


इस मुद्दे का समाधान न निकलने के कारण कोटक-आरबीआई का मामला 10 दिसंबर 2018 को कोर्ट पहुंचा था। कई बार सुनवाई के बाद अब 9 जनवरी, 2020 को सुनवाई होगी। बता दें कि कोटक महिंद्रा बैंक देश की 9वीं सबसे वैल्युएबल कंपनी है। बीते 3 साल में कोटक महिंद्रा दूसरा सबसे बढ़िया प्रदर्शन करने वाला बैंक है। अप्रैल 2019 तक बैंक का मार्केट कैप 2.60 लाख करोड़ रहा है जबकि प्रोमोटर हिस्सेदारी 29.99 फीसदी रही है।