Moneycontrol » समाचार » कंपनी समाचार

टास्क फोर्स की सिफारिशों पर काम शुरू, कितना सरल और आसान होगा टैक्स सिस्टम?

क्या आप जानते हैं कि भारत में अपनी आय पर आप जो टैक्स देते हैं यानि की इनकम टैक्स, वो दुनिया में सबसे ज्यादा दरों में से एक है।
अपडेटेड Sep 01, 2019 पर 12:47  |  स्रोत : Moneycontrol.com

क्या आप जानते हैं कि भारत में अपनी आय पर आप जो टैक्स देते हैं यानि की इनकम टैक्स, वो दुनिया में सबसे ज्यादा दरों में से एक है। लेकिन अब सरकार ने इसे बदलने का मन बना लिया है, ये कब तो होगा ये फिलहाल पक्के से नहीं बताया जा सकता लेकिन इनकम टैक्स पर बनी टास्क फोर्स ने इसे काफी संतुलित बनाने की सिफारिशें की हैं। इस सिफारिशों में न सिर्फ इनकम टैक्स को कम करने की बात है बल्कि इनकम टैक्स से जुड़े कई सुधारों की भी सिफारिश की गई है।


टास्क फोर्स की सिफारिश के मुताबिक 0-2.5 लाख की इनकम पर 0% यानी टैक्स भुगतान नहीं करना होगा जबकि 2.5-10 लाख रुपये की इनकम पर 10%, 10-20 लाख रुपये की इनकम पर  20%, 20 लाख से 2 करोड़ रुपये  की इनकम पर 30% और 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की इनकम पर 35% टैक्स चुकाना होगा।


मौजूदा इनकम टैक्स पर नजर डालें तो 0-2.5 लाख की इनकम पर 0% यानी टैक्स भुगतान नहीं करना होता है जबकि 2.5-5 लाख रुपये की इनकम पर 5%, 5-10 लाख रुपये की इनकम पर 20% और 20 लाख से ज्यादा की इनकम पर 30% टैक्स चुकाना होता है।


टास्क फोर्स की सिफारिश


टास्क फोर्स की सिफारिश में कहा गया है कि रिफॉर्म का फोकस मिडिल क्लास पर होना चाहिए। इनकम टैक्स में रिबेट की सीमा बढ़ाई जाए। रिबेट की सीमा 5 लाख रुपये से बढ़कर 6.25 लाख रुपये हो। टैक्स छूट वाली आय की सीमा ना बदलें। अभी 2.5 लाख रुपये तक आय पर टैक्स नहीं है लेकिन अब 2.5 लाख से 10 लाख रुपये आमदनी पर 10% टैक्स, 10 लाख से 20 लाख रुपये आमदनी पर 20% टैक्स, 20 लाख से 2 करोड़ रुपये की आमदनी पर 30% टैक्स और 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी पर 35% टैक्स देना होगा।


टास्क फोर्स की सिफारिश के मुताबिक सरचार्ज एक अस्थायी व्यवस्था होनी चाहिए। टैक्सपेयर्स की स्क्रूटनी फेसलेस बनाई जाए। सिस्टम के जरिए क्रॉस वेरिफिकेशन हो। निगरानी के लिए एजेंसियों में तालमेल होना चाहिए। एजेंसियां आपस में जानकारियां साझा करें। GST, कस्टम, FIU, IT विभाग में तालमेल हो।


टैक्स रिफॉर्म उम्मीदें


छोटे-छोटे कदम नहीं, बड़ा बदलाव करने की उम्मीद है। मौजूदा जरूरतों के हिसाब से सिस्टम में बदलाव होगा। अभी 1961 का IT कानून चलता है। IT का टैक्सपेयर बेस बढ़ाया जाए। नियम-कायदे पूरा करना आसान हो। इनकम टैक्स का फेसलेस असेसमेंट हो। विवादों, मुकदमों की गुंजाइश कम हो। वित्त विभाग के एजेंसियों में तालमेल हो। एजेंसियां आपस में जानकारी शेयर करें। टेक्नोलॉजी से क्रॉस वेरिफिकेशन हो।  इनकम टैक्स में लाल फीताशाही कम हो। टैक्स चोरी पर लगाम कसना आसान हो।


इनकम टैक्स में दिक्कतें


ऊंचे टैक्स रेट, टैक्स वसूली कम होगी। ऊंचे दर से टैक्स चोरी की प्रवृति की दिक्कतें सामने आती है। अभी इनकम टैक्स दर 30% तक है। दुनिया में सबसे ज्यादा दरों में से एक। प्रति व्यक्ति आय कम, टैक्स छूट ज्यादा होती है। इनकम टैक्स 1% से भी कम लोग देते हैं। कृषि पर इनकम टैक्स का ना होना। प्रोग्रेसिव टैक्स से टैक्स चोरी की प्रवृति है। ज्यादा इनकम पर ऊंची दर से टैक्स देना होता है। 


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।