भारत में पहली बार शुरू हुई हींग की खेती, जानिए कैसे 900 करोड़ रुपये का होगा बचत

ठंडी रेगिस्तानी परिस्थितियों में व्यापक पैमाने पर बंजर पड़ी जमीन का सदुपयोग करने के उद्देश्य से हींग की खेती को अपनाया गया है
अपडेटेड Oct 21, 2020 पर 08:11  |  स्रोत : Moneycontrol.com


हिमाचल प्रदेश में लाहौल घाटी के किसानों ने इतिहास रचते हुए पहली बार हींग (Asafoetida) की खेती शुरू की है। भारत में दुनिया में तैयार होने वाले हींग की करीब 50 फीसदी खपत होती है। समुद्रतल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर लाहौल के क्वारिंग गांव में बीते 15 अक्टूबर को देश का पहला हींग का पौधा रोपित किया गया। अफगानिस्तान से लाए गए कच्ची हींग के बीज का पालमपुर स्थित इंस्टीच्यूट ऑफ हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी (IHBT-Institute of Himalayan Bioresource Technology) की लैब में वैज्ञानिक तरीके से पौधा तैयार किया गया है। बता दें कि देश में अभी तक हींग की खेती नहीं होती थी।


बता दें कि भारत में हींग प्रमुख मसालों में से एक है और यह भारत (Hing Cultivation in India) में उच्च मूल्य की एक मसाला फसल है। भारत अफगानिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान से सालाना लगभग 1200 टन कच्ची हींग आयात करता है और इसके लिए प्रति वर्ष लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च करता है। 2019 में भारत ने अफगानिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान से करीब 1500 टन कच्ची हींग का आयात किया था, जिसपर  लगभग 942 करोड़ रुपये खर्च किए।


IHBT पालमपुर के प्रयासों के कारण हिमाचल प्रदेश के सुदूर लाहौल घाटी के किसानों के खेती के तरीकों में ये ऐतिहासिक बदलाव आया है। इस बदलाव की वजह से यहां के किसानों (Hing Farmers in India) ने इस इलाके की ठंडी रेगिस्तानी परिस्थितियों में व्यापक पैमाने पर बंजर पड़ी जमीन का सदुपयोग करने के उद्देश्य से अब हींग की खेती को अपनाया है। 


काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च यानी CSIR (Council of Scientific and Industrial Research) ने कहा कि भारत में शुरू हुई हींग की खेती- भारत में फेरुला अस्सा-फोटिडा (Ferula assa-foetida plants) नाम के पौधों की रोपण सामग्री का अभाव इस फसल की खेती में एक बड़ी अड़चन थी। IHBT इसके लिए हींग के बीज लाए और इसकी कृषि-तकनीक विकसित की।


भारत में हींग की खेती की शुरुआत करने के उद्देश्य से 15 अक्टूबर, 2020 को CSIR-IHBT के डॉयरेक्टर डॉ. संजय कुमार के हाथों लाहौल घाटी के क्वारिंग ( Kwaring village) नाम के गांव में एक किसान के खेत में हींग के पहले पौधे की रोपाई की गई। CSIR-IHBT के दल ने देश में इस महत्वपूर्ण फसल की शुरुआत के लिए अथक प्रयास किए।


संस्थान ने अक्टूबर, 2018 में ICAR-NBPGR नई दिल्ली के माध्यम से ईरान से लाए गए बीजों के छह गुच्छों का इस्तेमाल शुरू किया। ICAR-NBPGR ने इस बात की पुष्टि की कि पिछले तीस साल में देश में Asafoetida (Ferula assa-foetida) के बीजों के इस्तेमाल का यह पहला प्रयास था। CSIR-IHBT ने NBPGR की निगरानी में हिमाचल प्रदेश स्थित सीईएचएबी, रिबलिंग, लाहौल और स्पीति में हींग के पौधे उगाए।


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