भारत बायोटेक द्वारा मुआवजे के ऐलान के बाद भी 50 फीसदी से नीचे रही Covaxin की स्ट्राइक रेट

वैक्सीन के क्लिनिकल रूप से प्रभावी होने का तथ्य अभी अंतिम रूप से स्थापित नहीं हो पाया है
अपडेटेड Jan 18, 2021 पर 16:18  |  स्रोत : Moneycontrol.com

कोरोना वायरस वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxin) को लेकर भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने बड़ा ऐलान किया है। कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन की 55 लाख डोज (55 lakh doses of Covaxin) की आपूर्ति के लिए सरकार से ऑर्डर प्राप्त करने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कहा है कि अगर वैक्सीन लगवाने के बाद किसी को गंभीर प्रतिकूल प्रभाव होते हैं तो उसे कंपनी मुआवजा (Compensation) देगी।


वैक्सीन लगवाने वाले लोगों द्वारा जिस फॉर्म पर सिग्नेचर किए जाने हैं, उस पर भारत बायोटेक ने कहा है कि किसी प्रतिकूल या गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में आपको सरकारी चिन्हित और अधिकृत केंद्रों और अस्पतालों में चिकित्सकीय रूप से मान्यता प्राप्त देखभाल प्रदान की जाएगी। हालांकि, देश के जिन 11 राज्यों में वैक्सीनेशन हुआ, उनमें भारत बायोटेक के इस ऐलान के बाद भी काफी कम संख्या में लोगों ने Covaxin की वैक्सीन लगवाया।


विशेषकर तीनों राज्यों- बिहार, तमिलनाडु और तेलंगाना ( Bihar, Tamil Nadu and Telangana) की बात करें तो वैक्सीनेशन के पहले दिन 16 जनवरी को इन राज्यों में Covaxin का 50 प्रतिशत से कम स्ट्राइक रेट रहा है। पहले दिन तमिलनाडु में 600 में से केवल 99 कोवैक्सीन की खुराक दी गई। वहीं, राजस्थान में योजनाबद्ध तरीके से 600 में से 314 लोगों ने कोवैक्सीन का वैक्सीन लगाया गया। हालांकि, इन राज्यों में कोई गंभीर प्रतिकूल घटना सामने नहीं आई। काफी लोग सहमति फॉर्म पर सिग्नेचर करने को भी तैयार नहीं हुए।


PTI के मुताबिक, सहमति पत्र के अनुसार अगर Covaxin वैक्सीन से गंभीर प्रतिकूल प्रभाव होने की बात साबित होती है तो मुआवजा BBIL (Bharat Biotech International Limited) द्वारा अदा किया जाएगा। कोवैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में कोरोना के खिलाफ एंटीडोट विकसित होने की पुष्टि हुई है। वैक्सीन निर्माता के मुताबिक, वैक्सीन के क्लिनिकल रूप से प्रभावी होने का तथ्य अभी अंतिम रूप से स्थापित नहीं हो पाया है तथा इसके तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल में इसका रिसर्च अभी किया जा रहा है।


इसमें कहा गया है कि इसलिए यह जान लेना आवश्यक है कि वैक्सीन लगाने का मतलब यह नहीं है कि कोरोना संबंधी अन्य सावधानियों को नहीं बरता जाए। इस क्षेत्र के एक विशेषज्ञ के मुताबिक, चूंकि वैक्सीन अभी क्लिनिकल ट्रायल के चरण में ही है इसलिए यदि किसी को गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं तो मुआवजा देना कंपनी की जिम्मेदारी बनती है। इस बीच, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (BBIL) की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एल्ला ने ट्वीट कर कहा कि कोवैक्सीन और भारत बायोटेक, राष्ट्र और कोरोना योद्धाओं की सेवा करके सम्मानित और कृतज्ञ महसूस कर रहे हैं।


बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने 16 जनवरी को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ विश्व के सबसे बड़े वैक्सीनेशन (India Covid-19 Vaccination Drive) अभियान की शुरुआत की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मनोहर अगनानी ने कहा कि पहले दिन कोरोना वैक्सीनेशन अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार कुल 3,351 सत्र आयोजित किए गए जहां 1,65,714 लोगों को वैक्सीन लगाया गया।


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