Farm Bill राज्यसभा से पास कराने के लिए BJP ने बनाई खास रणनीति, सांसदों को जारी किया व्हिप

मोदी सरकार के लिए राज्यसभा से कृषि सुधारों से जुड़े तीनों विधेयक पास करना बड़ी चुनौती है, क्योंकि राज्यसभा में BJP के पास बहुमत नहीं है
अपडेटेड Sep 20, 2020 पर 11:59  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मोदी सरकार (Modi Government) कल यानी रविवार को राज्यसभा में फार्म बिल (Farm Bill) पेश कर सकती है। हालांकि, सरकार के लिए राज्यसभा से कृषि सुधारों से जुड़े तीनों विधेयक पास करना बड़ी चुनौती है, क्योंकि राज्यसभा में BJP के पास बहुमत नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बिल पास कराने के लिए एक खास रणनीति बनाई है। इसके तहत मोदी सरकार गैर कांग्रेसी दलों खासकर वाईएसआर कांग्रेस (YSR Congress) और बीजेडी (BJD) से संपर्क कर रही है। बीजेपी ने राज्यसभा के अपने सभी सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप (Whip) जारी किया है। व्हिप पार्टी के मुख्य सचेतक ने जारी किया है, ताकि बिल पास कराने के लिए राज्यसभा में BJP के सभी सांसद मौजूद रहें। लोकसभा में यह बिल गुरुवार को ही पास हो गया। 

गैर-कांग्रेसी दलों पर नजर

BJP को इस बिल पर अपने सबसे पुराने सहयोगी सिरोमणि आकाली दल (SAD) से समर्थन मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इस बिल के विरोध में अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर पहले ही मंत्री पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। केंद्र सरकार की नजर अब जगनमोहन रेड्डी (Jagan Mohan Reddy) की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस और नवीन पटनायक (Navin Patnaik) की पार्टी BJD पर है। BJP को उम्मीद है कि राज्यसभा में उपसभापति चुनाव की तरह ही उसे इन दोनों दलों का समर्थन मिलेगा। अगर BJP को राज्यसभा में इन दोनों पार्टियों का समर्थन मिलता है तो यह बिल राज्यसभा से भी पास हो जाएगा। मोदी सरकार राज्यसभा में इस बिल को ध्वनि मत से पारित कराने की कोशिश में है। इसके लिए सरकार ने अपने पुराने सहयोगी शिवसेना और एनसीपी (NCP) से भी संपर्क साधा है। वहीं, इस मुद्दे पर चर्चा के लिए द्रविड़ मुनेत्र कड़घम (DMK) ने 21 सितंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है।

RSS से जुड़े सगंठन ने भी किया विरोध

कृषि बिल के विरोध में अब RSS से जुड़ा संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) खड़ा हो गया है। भारतीय किसान संघ के महासचिव बद्री नारायण चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार का यब बिल बिजनेसमैन को फायदा पहुंचाने वाला है और इससे किसानों का जीवन और मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि BKS को इस बिल में किसानों की चिंता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे यह तय हो सके कि जब किसानों का का उत्पाद खरीदा जाएगा, उसी वक्त उसे पेमेंट हो जाएगा या फिर सरकार उसके पेमेंट की गारंटर बने।

अमृतसर में सड़कों पर उतरे किसान

पंजाब के अमृतसर में भी किसान कृषि विधेयक के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों ने शनिवार को सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। किसान नेताओं ने किसी भी हालत में उन्हें यह बिल मंजूर नहीं है। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार चाहे कोई भी रही हो, किसानों के आगे नतमस्तक होती रही है और इस बार किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि यह देश की बदकिस्मती है कि यहां अन्नदाता की की कदर नहीं है, उनको मजदूर बनाने की योजना बन रही है। किसानों को कारपोरेट सेक्टर के हवाले किया जा रहा है।

24 से 26 सितंबर तक रेल रोको आंदोलन

पंजाब में किसान मजदूर संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार के कृषि से संबंधित विधेयकों (Farm Bills) के खिलाफ प्रदर्शन को और तेज करने का निर्णय करते हुए इस विधेयक के विरोध में 24 से 26 सितंबर के बीच रेल रोको आंदोलन का घोषणा की है। पंजाब में तीन दिन ट्रेन नहीं चलने दिया जाएगा। समिति के महासचिव सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि हमने राज्य में कृषि से संबंधित विधेयकों के खिलाफ रेल रोको आंदोलन करने का फैसला किया है। आपको बता दें कि इस बिल के विरोध में पंजाब के विभिन्न कृषि संगठन पहले ही 25 सितंबर को बंद की घोषणा कर चुके हैं।

27 सितंबर को बिहार बंद का आह्वान

जन अधिकार पार्टी के संरक्षक और पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शनिवार को केंद्र के कृषि विधेयक का जमकर विरोध किया। उन्होंने इसे खेती को अमीरों के हाथों गिरवी रखने वाला कानून बताया और इसके खिलाफ 27 सितंबर को बिहार बंद का आह्वान किया। पप्पू यादव ने केंद्र सरकार से किसानों के लिए ऐसा कानून बनाने को कहा जिसमें उनका अनाज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम पर नहीं बिके। वहीं, विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद डॉ संजय जायसवाल ने कहा है कि लोकसभा में पारित कृषि सुधार विधेयक किसानों को बिचौलियों से मुक्ति तो दिलाएगा ही, किसानों की आर्थिक उन्नति का रास्ता भी खोलेगा। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के विरोध में वही लोग हैं, जिनका कृषि से कभी वास्ता नहीं पड़ा है। ले लोग क्या जानें खेती-बाड़ी का हाल और किसानों का दुख-दर्द।

इसलिए हो रहा विरोध

केंद्र सरकार के Farm Bills के मुताबिक, अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। पहले किसानों की फसल को सिर्फ मंडी से ही खरीदा जा सकता था। इसके अलावा केंद्र सरकार ने दाल, आलू, प्याज और अनाज आवश्यक वस्तु नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा खत्म कर दी है। साथ ही केंद्र सरकार ने कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने की नीति पर काम करने की बात कही है। Farm Bills में मिनिमम सपोर्ट प्राइस का कोई जिक्र नहीं। किसानों का कहना है कि इस बिल में खरीद के पैसे व्यापारी से किसानों को मिलने की की गारंटी नहीं की गई है। इन्हीं मुद्दों पर किसान इस बिल का विरोध कर रहे हैं।

सरकार पर ये हैं आरोप

किसानों और अकाली दल समेत विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि इस बिल के कारण अनाज मंडियों के खत्म हो जाने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो किसानों तो न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नहीं मिलेगा। उनकी मांग है कि देश में वन नेशन वन एमएसपी (One Nation one MSP) होनी चाहिए। साथ ही इस बिल में कीमतें तय करने का कोई मैकेनिज्म नहीं है। किसानों को डर है कि इससे निजी कंपनियों को किसानों के शोषण का जरिया मिल जाएगा और किसान मजदूर बन जाएंगे। किसान संगठनों का आरोप है कि इससे कारोबारी जमाखोरी करेंगे और खाद्य पदार्थ की कीमतों में अस्थिरता आएगी। इससे खाद्य सुरक्षा खत्म हो जाएगी और आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी बढ़ेगी।

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