खराब वेंटिलेटर पर बॉम्बे HC ने की केंद्र की खिंचाई, कहा- ऐसा लगता है कंपनी का बचाव कर रहे हैं आप

HC में दाखिल किए हलफनामें में केंद्र ने कहा कि ये वेंटिलेटर PM केयर्स फंड के तहत नहीं दिए गए थे
अपडेटेड May 29, 2021 पर 10:08  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को हाई कोर्ट के सामने पूरी तरह से इनकार कर दिया कि मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (GMCH), औरंगाबाद को सप्लाई किए गए खराब वेंटिलेटर (Ventilators) PM केयर्स फंड (PMCARES Fund) के माध्यम से प्रदान किए गए थे। साथ ही कहा कि इसे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के जरिए खरीदा गया था।


इंडियन एख्सप्रेस  बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा था। इस पर सहायक सॉलिसिटर जनरल अजय तलहर ने शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव जी के पिल्लई की ओर से हलफनामा दायर किया।


उधर हलफनामे में सरकार का जवाब पढ़ कर हाई कोर्ट ने सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि हलफनामा पढ़ कर ऐसा लग रहा है, जैसे सरकार वेंटिलेटर बनाने वाली गुजरात की कंपनी के दावों का समर्थन कर रही है।


हलफनामें में कहा गया कि उपकरण में कोई खराबी नहीं है और दूसरे कई राज्यों में उसने, जो वेंटिलेटर दिए हैं। वह ठीक तरह से काम कर रहे हैं। इसमें कहा गया, "अस्पताल के कर्मचारियों को ठीक तरह से ट्रेनिंग दी जानी चाहिए और उन्हें वेंटिलेटर इस्तेमाल करना नहीं आ रहा है।"


हाई कोर्ट ने पूछा "क्या आप (केंद्र) कंपनी को सही ठहराना चाहते हैं या इस तथ्य से अवगत हैं कि ये वेंटिलेटर लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं?" बेंच ने कहा कि हैरानी की बात है कि केंद्र कंपनी के दावों के जस का तस कैसे मान लिया और आपने ये तक नहीं कहा कि इस मामले की जांच होगी।


कोर्ट ने कहा, "हम इस दावे को सही नहीं मान सकते कि वेंटिलेटर सही स्थिति में हैं।" "हम सराहना करते अगर हलफनामे में आरोप-प्रत्यारोप से बचा जाता और इसके बजाय मरीजों के प्रति संवेदनशीलता दिखाई जाती, अपने नागरिकों की देखभाल करना सरकार का सर्वोपरि उद्देश्य है।"


दरअसल इस हफ्ते के शुरू में औरंगाबाद में सरकारी अस्पतालों के डीन और कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने अदालत को बताया था कि पीएम केयर्स फंड के तहत केंद्र से मिले 150 वेंटिलेटर में से 113 खराब थे।


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