बीएसएफ ने बख्तरबंद ट्रैक्टर से की खेती, 18 साल बाद सीमा पर सरकंडों की जगह दिखेंगी लहलहाती फसलें

सुरक्षा कारणों से इस साल खेती का सारा जिम्मा बीएसएफ और प्रशासन के पास है
अपडेटेड Sep 16, 2020 पर 14:50  |  स्रोत : Moneycontrol.com

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सेना की सख्त नीतियों के कारण जहां आतंकवादियों की घुसपैठ में कमी आई है वहीं सेना और अन्य सुरक्षादलों का आत्मविश्वास बढ़ा है। उसका एक नजारा मंगलवार को उस समय नजर आया जब कड़ी सुरक्षा के बीच बीएसएफ ने बख्तरबंद ट्रैक्टर से सीमा पर स्थित खेतों की जुताई शुरू की। प्रशासन और बीएसएफ के सहयोग से करीब 18 सालों के बाद हजारों एकड़ जमीन पर फसलें लहलहायेंगी। उपयोग ना होने से इन जमीनों पर झाड़ियां, सरकंडे उग चुके हैं जहां आने वाले दिनों में फसलें दिखाई देंगी।


सुरक्षा कारणों से इस साल खेती का सारा जिम्मा बीएसएफ और प्रशासन के पास है। अगले साल से जमीन खेती के लिए पूरी तरह से किसानों को सौंप दी जाएगी। पहले दिन चार बख्तरबंद ट्रैक्टरों से खेत जोते गए। इसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि इस योजना के तहत 1222 किलोमीटर की सीमा पर उपयोगी जमीनों पर खेती हो सकेगी।


इससे पहले सरकार ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा रेखा यानी जीरो लाइन पर खेती करने की तैयारी दिखाई थी जिसके तहत बॉर्डर पर स्थिति का जायजा लेने और खेती की तैयारी को लेकर कठुआ के उपायुक्त ओपी भगत, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक अधिकारी, कृषि विभाग के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और सीमा क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि ने जीरो लाइन पर बैठक हुई थी।


बैठक में निर्णय लिया गया था कि अगली फसल किसान खुद लगाएंगे। बैठक में ये फैसला किया गया कि 2002 में जैसी यह जमीनें किसानों ने छोड़ी थीं, उन्हें वैसी ही वापस दी जाएंगी। वे उसके बाद यहां बिना किसी डर के खेती करें। इसके लिए बीएसएफ द्वारा किसानों को पूरी सुरक्षा भी मुहैया कराई जाएगी और इसके साथ-साथ बीएसएफ को सीमा पर निगरानी करना भी आसान हो जायेगा।


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