West Bengal: PM कहेंगे तो उनके पैर छू लूंगी, लेकिन अपमान सहन नहीं करूंगी, बैठक में शामिल न होने पर बोलीं ममता

ममता बनर्जी ने कहा कि जब ये बैठक PM-CM के बीच होनी थी, तो इसमें BJP नेताओं और राज्यपाल को क्यों बुलाया गया
अपडेटेड May 30, 2021 पर 09:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने चक्रवात यास (Cyclone Yaas) समीक्षा बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर उठे विवाद के एक दिन बाद शनिवार को कहा कि अगर प्रधानमंत्री उन्हें अपने राज्य के लोगों के कल्याण के लिए उनके पैर छूने के लिए कहते हैं, तो वह इसके लिए तैयार हैं, लेकिन उनका "अपमान नहीं किया जाना चाहिए।" CM ने बीजेपी नेताओं और राज्यपाल को बैठक में आमंत्रित करने पर भी निराशा जताई।


न्यूज18 के मुताबिक, ममता ने कहा, "PMO ने मुझे अपमानित किया और मेरी छवि खराब करने के लिए ट्वीट किए। जब ये बैठक PM और CM के बीच होने वाली थी, तो BJP नेताओं और राज्यपाल को चक्रवात की समीक्षा बैठक के लिए क्यों बुलाया गया? मुझे अपमानित महसूस हुआ।" बनर्जी ने पीएम मोदी से मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को वापस दिल्ली बुलाए जाने के आदेश को वापस लेने का भी अनुरोध किया।


विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चक्रवात के बाद की स्थिति की समीक्षा करने के लिए ओडिशा गए और फिर वहां से पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुए, जहां चक्रवात यास ने तटीय जिलों में कहर बरपाया।


राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और देबाश्री चौधरी सहित राज्य के नेता तूफान से हुए नुकसान पर प्रधानमंत्री के साथ बैठक करने वाले थे।


हालांकि, सूत्रों ने कहा कि बनर्जी ने नेताओं को 30 मिनट तक इंतजार कराया और फिर "केवल कुछ मिनटों के लिए बैठक में पहुंचीं और नुकसान के आकलन के रूप में प्रधान मंत्री को दस्तावेज का एक बंडल सौंप दिया और वहां से चली गईं।" इसके चलते कई BJP नेताओं ने CM पर तीखा जुबानी हमला किया।


इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने उन पर "जन कल्याण से ऊपर अहंकार" रखने का आरोप लगाया, जबकि वरिष्ठ मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके आचरण को चौंकाने वाला और दर्दनाक बताया। BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन पर "संवैधानिक लोकाचार की हत्या" का आरोप लगाया।


सूत्रों ने आगे कहा कि इससे बड़ा झटका ये लगा कि स्क्रीन पर प्रेजेंटेशन स्लाइड लोड होने के बावजूद बनर्जी ने मुख्य सचिव या गृह सचिव को प्रधान मंत्री के सामने प्रेजेंटेशन देने की भी अनुमति नहीं दी। कुछ सरकारी नेताओं ने इसे "भारत सरकार के सर्वोच्च पद की अवहेलना" का उदाहरण बताया।


कुछ दूसरे सूत्रों ने कहा कि शुक्रवार को होने वाली PM की समीक्षा बैठक में बनर्जी के प्रतिद्वंद्वी और नंदीग्राम से विजेता सुवेंदु अधिकारी को भी शामिल होने का निमंत्रण था। इस वजह से भी शायद मुख्यमंत्री बैठक में शामिल नहीं हुईं।


उन्होंने जोर देकर कहा कि ये एक "सरकार से सरकार" की बैठक है, जिसमें विपक्ष के नेता (LOP) के उपस्थित होने की कोई जरूरत नहीं है और संकेत दिया कि अगर अधिकारी को इसका हिस्सा बनाया गया, तो वह बैठक को छोड़ देंगी।


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