Chamoli Glacier Burst: लापता 135 लोगों को मृत घोषित करेगी सरकार, रेस्क्यू ऑपरेशन में 70 शव हुए बरामद

चमोली आपदा (Chamoli Disaster) में लापता 204 लोगों में से, खोज और बचावकर्मियों ने 70 शव बरामद किए हैं, जबकि 135 अभी भी लापता हैं
अपडेटेड Feb 23, 2021 पर 16:06  |  स्रोत : Moneycontrol.com

उत्तराखंड (Uttarakhand) के स्वास्थ्य विभाग ने केंद्र से मिले निर्देशों के तहत 7 फरवरी की चमोली आपदा (Chamoli Glacier Burst) में लापता लोगों को "मृत" घोषित करने का फैसला किया है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, अधिकारियों ने सोमवार को ये जानकारी दी है। चमोली आपदा (Chamoli Disaster) में लापता 204 लोगों में से, खोज और बचावकर्मियों ने 70 शव बरामद किए हैं, जबकि 135 अभी भी लापता हैं।


राज्य के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी की तरफ से रविवार शाम को जारी एक अधिसूचना के बाद, सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 लागू किया है, जिसके तहत नामित सरकारी अधिकारी लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र उनके परिवार या रिश्तेदारों को जारी करेंगे।


अधिसूचना में कहा गया है, “सामान्य परिस्थितियों में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति को उसी स्थान पर जारी किए जाते हैं, जहां वह जन्म लेता है या मर जाता है, लेकिन चमोली आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों में, अगर कोई लापता व्यक्ति संभवतः जीवित होने की सभी संभावनाओं से परे मर चुका है, लेकिन उसका शव अभी तक नहीं मिला है, तो उस स्थिति में अधिकारी एक जरूरी पूछताछ के बाद उसके परिवार के सदस्यों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करके मृत घोषित कर सकते हैं।"


मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सरकार ने लापता लोगों को तीन कैटेगरी में बांटा है। नोटिफिकेशन में नेगी ने कहा, "पहली कैटेगरी में साइट के पास के क्षेत्र के निवासी हैं, जो साइट से गायब हो गए थे। दूसरी कैटेगरी में राज्य के अन्य जिलों के लोग हैं, जो साइट पर मौजूद थे। जबकि, तीसरी श्रेणी में टूरिस्ट या दूसरे राज्यों के लोग शामिल हैं, जो साइट पर मौजूद थे।"


उन्होंने आगे कहा, ''प्रक्रिया के तहत, परिवार के सदस्यों को संबंधित सरकारी अधिकारी के सामने सभी जरूरी जानकारियों के साथ लापता व्यक्ति के बारे में एक हलफनामा पेश करना होगा, जो उचित जांच के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेगा। इससे लापता लोगों के परिवारों के लिए मुआवजे का निपटान करने में मदद मिलेगी।”


मालूम हो कि 7 फरवरी को उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ (Joshimath) में एक ग्लेशियर के टूटने से देहरादून से लगभग 300 किलोमीटर उत्तर में नैना देवी राष्ट्रीय उद्यान के पास दो हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित हो गए हैं।


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