घर-घर जाकर वैक्सीनेशन करने से बचाई जा सकती थी कई जानें- Bombay High Court

बॉम्बे हाईकोट ने सरकार से घर-घर जाकर टीकाकरण करने के बारे में फिर से विचार करने को कहा है
अपडेटेड May 13, 2021 पर 12:14  |  स्रोत : Moneycontrol.com

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने कोरोना वैक्सीनेशन को लेकर टिप्पणी की है और कहा कि यदि घर-घर जाकर (Door-to-door vaccination) टीकाकरण अभियान चलाया गया होता तो वरिष्ठ नागरिकों सहित कई जानी-मानी हस्तियों की जानें बचाई जा सकती थी। कोर्ट ने 22 अप्रैल के अपने आदेश को दोहराया जिसमें केंद्र सरकार से कहा गया था कि वह घर-घर जाकर टीकाकरण न करने के अपने फैसले पर एक बार और सोचे। कोर्ट की ओर से इस पर केंद्र से 19 मई तक शपथपत्र दाखिल करने के लिए कहा गया है।


बॉम्बे हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जी एस कुलकर्णी की खंडपीठ दो वकीलों धृति कपाड़िया और कुणाल तिवारी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर कल यानी बुधवार को सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में 75 वर्ष से अधिक उम्र के सीनियर सिटिजंस, विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए घर-घर टीकाकरण की सुविधा की मांग की गई थी।


सुनवाई  के दौरान पीठ ने केंद्र से कहा कि जब सीनियर सिटिजंस टीकाकरण कराने के लिए टीकाकरण केंद्रों में जाने में असमर्थ हैं तो क्या घर-घर जाकर टीकाकरण के इस अभियान को सक्रिय रूप से शुरू नहीं करना चाहिए।  कोर्ट ने 22 अप्रैल के अपने पहले के आदेश को दोहराया जिसमें उसने केंद्र से डोर-टू-डोर टीकाकरण अभियान शुरू नहीं करने के अपने फैसले पर विचार करने के लिए कहा।


कोर्ट ने कहा कि वैक्सीन सेंटर्स के बाहर लंबी-लंबी कतारों में लगे बुजुर्ग नागरिकों और व्हीलचेयर पर बैठे लोगों की तस्वीरें बेहद दुखदायी हैं। कोर्ट ने बीएमसी के टीकाकरण शिविर की जानकारी पर सुझाव दिया कि ऐसे शिविरों में उन लोगों की पहचान कर टीका लगाया जा सकता है जो घर से बाहर नहीं जा सकते हैं। इसे लेकर कोर्ट ने बीएमसी से शपथपथ दायर करने के लिए भी कहा है। 


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