दिल्ली में हिंसा के बाद किसानों ने बजट के दिन होने वाले संसद मार्च रद्द किया

संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि वह एक फरवरी को संसद मार्च नहीं करेंगे
अपडेटेड Jan 28, 2021 पर 08:39  |  स्रोत : Moneycontrol.com

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस (Republic Day Violence) के दिन ट्रैक्टर परेड के नाम पर हुए शर्मनाक उपद्रव के बाद नए कृषि कानूनों के खिलाफ दो महीने से प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 1 फरवरी को होने वाले संसद मार्च को स्थगित कर दिया है। अब संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि वह एक फरवरी को संसद मार्च नहीं करेंगे। बता दें कि किसान नेताओं (Farmers Unions) ने ऐलान किया था कि वो एक फरवरी को दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं से संसद की ओर पैदल मार्च करेंगे।


इससे पहले किसानों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च किया था। ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से हटकर प्रदर्शनकारी किसानों का एक ग्रुप मंगलवार को लालकिले में घुस गया और राष्ट्रीय राजधानी स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक के कुछ गुंबदों पर झंडे लगा दिए। पूरा किसान आंदोलन उपद्रवियों की लाल किले पर अपना झंडा फहराने से कठघरे में आ गया है। ट्रैक्टर परेड के नाम पर हुए शर्मनाक तांडव के बाद अब देश भर से उपद्रवकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग हो रही है।


पुलिस द्वारा मंगलवार को ITO से खदेड़े गए प्रदर्शनकारी किसानों का एक ग्रुप अपने ट्रैक्टर लेकर लालकिला परिसर पहुंच गया। ये प्रदर्शनकारी लालकिला परिसर में घुस गए और उस ध्वज-स्तंभ पर अपना झंडा लगाते दिखे जहां से प्रधानमंत्री 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। उन्होंने लालकिले के कुछ गुंबदों पर भी अपने झंडे लगा दिए। इससे पहले प्रदर्शनकारी किसान ITO पहुंच गए और लुटियंस इलाके की तरफ बढ़ने की कोशिश की। इसपर पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।


गणतंत्र दिवस पर शर्मशार करने वाली तस्वीरें सामने आने के बाद कई किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के नाम पर शुरू हुए इस आंदोलन से किनारा करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन (Rashtriya Kisan Mazdoor Sangathan) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह (AIKSCC leader VM Singh) ने बुधवार को ऐलान किया है कि उनका संगठन किसानों के आंदोलन से अलग हो रहा है। सिंह ने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) पर गंभीर आरोप लगाते हुए खुद और अपने संगठन को इस आंदोलन से अलग करने का ऐलान किया है। उन्‍होंने कहा कि हम अपना आंदोलन यहीं खत्‍म करते हैं। हमारा संगठन इस आंदोलन से अलग है।


उधर, भारतीय किसान यूनियन (भानू) के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष भानू प्रताप सिंह ने भी खुद को किसान आंदोलन से अलग करने का ऐलान कर दिया है। उन्‍होंने कहा कि मैं कल दिल्‍ली में हुई घटना से इतना दुखी हूं कि मैं इसी समय से घोषणा करता हूं कि अपने संगठन के धरने को खत्‍म करता हूं। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह (Thakur Bhanu Pratap Singh) ने बुधवार को कहा कि मैं कल की घटना से इतना दुखी हूं कि इस समय मैं चिल्ला बॉर्डर से घोषणा करता हूं कि पिछले 58 दिनों से भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union, Bhanu) का जो धरना चल रहा था उसे खत्म करता हूं।


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