Farmers Protest: आंदोलन का आज 33वां दिन, किसानों को सरकार के जवाब का इंतजार, बातचीत पर सस्पेंस

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 33वां दिन है
अपडेटेड Dec 28, 2020 पर 15:38  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों के आंदोलन (Farmers Protest) का आज 33वां दिन है। किसान संगठनों ने 29 दिसंबर को सुबह 11 बजे केंद्र सरकार से अगले दौर की बातचीत का प्रस्ताव दिया है, लेकिन किसानों की सरकार से बातचीत पर अभी सस्पेंस बरकरार है। दरअसल, केंद्र ने एक दिन बाद भी यह साफ नहीं किया है कि क्या वह प्रदर्शनकारी किसानों की शर्तों पर उनसे मंगलवार को बातचीत करेगी या नहीं। बता दें कि बातचीत को लेकर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के सामने शर्तें रखी हैं


किसानों ने कृषि कानून रद्द करने की प्रक्रिया बताए जाने के क्रम में बातचीत करने की शर्त रखी है। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भी सरकार के रुख की जानकारी नहीं है। उधर, प्रमुख किसान नेताओं ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार सोमवार को जरूर कहेगी कि वह बातचीत करेगी। हालांकि किसान संगठन के नेताओं ने कहा कि वह इस मामले में सरकार की प्रतिक्रिया नहीं आने से बेचैन नहीं हैं। एक प्रमुख किसान नेता ने कहा कि सरकार बार-बार बातचीत के प्रस्ताव भेजकर गेंद हमारे पाले में फेंक रही थी, हमने सशर्त बातचीत की तारीख और समय बताकर उसकी तरफ गेंद फेंक दी है।


इस बीच एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान पहले उन मुद्दों पर बातचीत करें, जिन पर दोनों पक्षों को कोई समस्या नहीं है। MSP के मुद्दे पर सरकार प्रदर्शनकारी किसानों के साथ लंबी चर्चा चाहती है ताकि वह उन्हें यह समझा सके कि सभी कृषि उपज पर यह लागू करना क्यों संभव नहीं है। जहां तक कृषि कानून हैं, उन पर सरकार का रुख यही है कि किसान क्लॉज वार अपनी शंकाएं बताएं, सरकार उनका हर हाल में समाधान सुझाएगी। इस बीच किसान नेता अतुल अंजान ने बताया कि किसान अपने आन्दोलन को तेज करने वास्ते एक जनवरी को हर जिले और गांव में संविधान संकल्प लेंगे।


बता दें कि किसान पिछले 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की कई सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। किसान इन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। किसानों और सरकार के बीच कई दौर की वार्ता विफल रही है। केंद्र सरकार सितंबर में पारित तीन नए कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे। हालांकि सरकार ने बार-बार दोहराया है कि MSP और मंडी व्यवस्था कायम रहेगी और उसने विपक्ष पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। अब तक सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई वार्ता विफल रही है।


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