Farmers Protest Updates: पीएम मोदी ने कहा-किसानों के खिलाफ काम करने वाले फैला रहे गलत अफवाह

किसानों के प्रदर्शन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक करने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर उनके घर से रवाना हो चुके हैं
अपडेटेड Dec 01, 2020 पर 08:26  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पीएम नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून की वकालत की है। उन्होंने कहा कि जो लोग किसानों के खिलाफ है वो ही गलत अफवाह फैला रहे हैं और किसानों को डराने का काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, "ये ऐतिहासिक कृषि सुधार हैं। इसके खिलाफ गलत अफवाह फैलाने वाले लोग हमेशा किसानों के खिलाफ रहे हैं। MSP हमेशा से था लेकिन इसके लिए कोई तय प्लान नहीं था। उनलोगों ने किसानों की कर्ज माफी से जुड़े झूठे वादे भी किए हैं।"


क्या कर रहे हैं किसान?


केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान अब पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) की दहलीज पर केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 5वां दिन है। दिल्ली-हरियाणा सिंधु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर (Tikri and Singhu Borders) किसानों के आंदोलन की वजह से सील कर दिया गया है। उधर, गाजीपुर-गाजियाबाद बॉर्डर (Ghazipur-Ghaziabad Border) पर भी किसानों के जमावड़े को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेड्स और सिक्योरिटी बढ़ा दी है। वहीं, किसानों के प्रदर्शन को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात की। गृह मंत्री के साथ बैठक करने के बाद कृषि मंत्री उनके घर से रवाना हो चुके हैं।


दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ट्वीट कर कहा है कि सिंधु बॉर्डर की ओर जाने से बचें। टिकरी बॉर्डर के लिए पुलिस ने दूसरे रास्तों का सुझाव दिया है। झरोदा, धांसा, दौराना जातिकेरा बदसौरी की ओर से जाने की सलाह दी गई है। पुलिस ने बताया कि किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए सिंघु और टिकरी बॉर्डर को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। दिल्ली से लगे करीब सभी सीमाओं पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। आज गुरूनानक जयंती भी है, ऐसे में किसान सड़कों पर ही अरदास कर रहे हैं। किसान आज दिल्ली के 5 एंट्री पॉइंट्स को सील करने की तैयारी में हैं।


दिल्ली पुलिस के मुताबिक, टिकरी और सिंधु बॉर्डर पर किसी तरह की ट्रैफिक मूवमेंट की इजाजत नहीं है। पहले दिल्ली-हरियाणा के सिंधु बॉर्डर पर किसानों ने बड़ी संख्या में डेरा जमाया और पुलिस से संघर्ष भी किया। अब दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बॉर्डर पर भी ऐसा ही हाल है और किसान यहां पर बैठ गए हैं, जिसके कारण दिल्ली-एनसीआर के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। गाजियाबाद और गाजीपुर को जोड़ने वाले बॉर्डर (Delhi-UP) पर बड़ी संख्या में किसानों ने डेरा जमाया हुआ है। यहां बीती रात बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर डटे रहे और कृषि कानून का विरोध किया।


सरकार चाहती है कि सभी किसान दिल्ली के बुराड़ी पहुंचें तो बातचीत की जाए, लेकिन किसानों ने रविवार को कहा था कि बुराड़ी नहीं जाएंगे और दिल्ली की घेराबंदी के लिए 5 एंट्री पॉइंट्स पर धरना देंगे। किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि हमारे पास इतना राशन है कि चार महीने भी हमें रोड पर बैठना पड़े, तो बैठ लेंगे।उधर, सरकार अपनी स्ट्रैटजी बनाने में जुटी है। गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर रविवार देर रात बैठक की।


किसानों ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकराया


किसानों के लगातार भारी विरोध-प्रदर्शन के बीच सरकार ने शनिवार को कहा कि वह उनके साथ कभी भी बातचीत के लिए तैयार है और साथ ही उनसे आंदोलन बंद करने का आग्रह भी किया। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए तीन दिसंबर को 32 प्रदर्शनकारी किसान संगठनों के साथ एक बैठक पहले ही निर्धारित की जा चुकी है और यदि ये संगठन चाहें तो सरकार उनके नेताओं से पहले भी बातचीत करने के लिए तैयार है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी शनिवार को किसानों से अपील की कि वे अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के बुराड़ी मैदान में चले जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि किसानों के निर्धारित स्थल पर जाते ही केंद्र सरकार उनके साथ वार्ता करने के लिए तैयार है।


दूसरी तरफ किसानों ने रविवार को फैसला किया कि वे राष्ट्रीय राजधानी के बुराड़ी मैदान में नहीं जाएंगे और दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहेंगे। गौरतलब है कि ऑल-इंडिया किसान संघर्ष को-ओर्डिनेशन कमेटी, राष्ट्रीय किसान महासंघ और भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के अलग-अलग धड़ों ने दिल्ली चलो मार्च का आह्वान किया था। किसान केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनको आशंका है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था खत्म हो जाएगी और उन्हें बड़े उद्योगपतियों के रहम पर छोड़ दिया जाएगा।


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