NBFC और हाउसिंग फाइनेंस को फंड मुहैया कराने के लिए RBI की नई स्कीम

NBFC और HFC को नकदी मुहैया कराने के पीछे मकसद है फाइनेंशियल सेक्टर को किसी झटके से बचाना
अपडेटेड Jul 02, 2020 पर 08:05  |  स्रोत : Moneycontrol.com

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बुधवार को बताया कि भारत सरकार ने SPV (Special Purpose Vehicle) के जरिए NBFC और HFC (हाउसिंग फाइनेंस कंपनीज) की नकदी बढ़ाने के लिए एक स्कीम पास कर दी है। NBFC और HFC को नकदी मुहैया कराने के पीछे मकसद  है फाइनेंशियल सेक्टर को किसी झटके से बचाना। RBI ने यह भी बताया कि इस स्कीम के दायरे में कौन-कौन सी कंपनियां आ सकती हैं। RBI ने इसके लिए जो शर्तें बताई हैं वो ये हैं। 


माइक्रोफाइनेंस सहित वो सभी NBFC जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के तहत रजिस्टर हैं उन्हें इस स्कीम का फायदा मिलेगा। लेकिन जो कंपनियां कोर इनवेस्टमेंट कंपनियों की तरफ रजिस्टर हैं वे इस स्कीम के दायरे से बाहर रहेंगी।


-वो हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFC) जो नेशनल हाउसिंग बैंक एक्ट, 1987 के तहत रजिस्टर हैं।


-31 मार्च 2019 तक NBFC और HFC की CRAR (कैपिटल टू रिस्क एसेट्स रेशियो) 15 फीसदी और CRR (कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो) 12 फीसदी से कम नहीं होना चाहिए। यह सीमा रेगुलेटर के मुताबिक न्यूनतम है।


-NBFC और HFC का NPA 31 मार्च 2019 तक लोन बुक का 6 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए।


-पिछले दो फाइनेंशियल ईयर यानी 2017-18 और 2018-19 में किसी भी एक साल में NBFC और HFC को प्रॉफिट में रहना जरूरी है।


-1 अगस्त 2018 से पहले एक साल में NBFC और HFC के खिलाफ किसी बैंक ने स्पेशल मेंशन अकाउंट यानी SMA-1 या SMA-2 कैटेगरी में उनकी बॉरोइंग के लिए कोई रिपोर्ट ना की हो।


-मार्केट रेगुलेटर सेबी की रजिस्टर्ड रेटिंग के हिसाब से NBFC और HFC इनवेस्टमेंट ग्रेड में रेटिंग होनी चाहिए।


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