Good News: सरकार ने यह सुझाव माना तो सिर्फ एक साल बाद ही मिलने लगेगी ग्रेच्युटी

संसदीय समिति ने दिया ग्रेच्युटी की समयसीमा 5 साल से घटाकर 1 साल करने का सुझाव
अपडेटेड Aug 07, 2020 पर 08:19  |  स्रोत : Moneycontrol.com

श्रम मामलों की संसदीय समिति (Parliamentary Standing Committee) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में सिफारिश की है कि कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी (Gratuity) की मौजूदा समयसीमा को घटाकर एक साल कर दिया जाए। बता दें कि फिलहाल ग्रेच्युटी पाने की समयसीमा 5 साल है। Money Control की एक रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने बेरोजगारी बीमा और ग्रेच्युटी पाने के लिए लगातार काम करने की समयसीमा को 5 साल से कम करके एक साल करने की सिफारिश की है। कोरोनो वायरस महामारी के दौरान आर्थिक तंगी के कारण कंपनियों में हो रही छंटनी के बीच यह सुझाव दिया गया है। श्रम पर संसद की स्थाई समिति के अध्यक्ष बीजू जनता दल के सांसद सांसद भर्तृहरि महताब (Bhartruhari Mahtab) हैं।


श्रम पर संसद की स्थायी समिति ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 (Code of Social Security, 2019) पर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपी है, जो श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नौ कानूनों की जगह लेगी। लोकसभा अध्यक्ष को सौंपी अपनी रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि इस तरह के प्रावधान संविदा कर्मियों, मौसमी मजदूरों, तय दर वाले श्रमिकों और दैनिक/मासिक वेतनभोगी कर्मचारियों सहित हर तरह के कर्मचारियों के लिए लागू किए जा सकते हैं। समिति ने जोर दिया है कि एक नियोक्ता द्वारा बकाया का भुगतान नहीं करने की स्थिति में एक मजबूत निवारण तंत्र होना चाहिए।


ग्रेच्युटी की समयसीमा घटाकर 1 साल करने पर जोर देते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ज्यादातर कर्मचारियों को कम समय के लिए ही नियुक्त किया जाता है, जो उन्हें मौजूदा मानदंडों के अनुसार ग्रेच्युटी पाने के अयोग्य बनाते हैं। इसलिए समिति चाहती है कि ग्रेच्युटी भुगतान संहिता के तहत निर्धारित 5 साल की समयसीमा को घटाकर एक साल की निरंतर सेवा कर दिया जाए। इसने आगे सिफारिश की है कि इस सुविधा को सभी प्रकार के कर्मचारियों तक बढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें ठेका मजदूर, मौसमी श्रमिक और निश्चित अवधि के कर्मचारी और दैनिक/मासिक वेतन कर्मचारी शामिल हैं।


अप्रैल में कोरोना महामारी पर काबू पाने के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण सामने आए प्रवासी संकट को ध्यान में रखते हुए संसदीय समिति ने सिफारिश की है कि सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 में अंतरराज्यीय प्रवासी श्रमिकों को एक अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया जाए और विशेष रूप से उनके लिए ही उपयोग होने वाली एक कल्याण निधि बनाई जानी चाहिए। इस निधि का Financing उन्हें भेजने वाले राज्य, रोजगार देने वाले राज्य, ठेकेदार, प्रमुख नियोक्ताओं और पंजीकृत प्रवासी श्रमिक के आनुपातिक अंशदान से होना चाहिए। 


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