Illegal Arms License Case: जम्मू कश्मीर में करीब 40 जगहों पर CBI के छापे, दिल्ली में भी हुई रेड

अधिकारियों ने बताया कि कम से कम दो IAS अधिकारियों शाहिद इकबाल चौधरी और नीरज कुमार के परिसरों पर छापेमारी हुई
अपडेटेड Jul 24, 2021 पर 16:23  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने अनिवासियों को फर्जी दस्तावेज के आधार पर हजारों शस्त्र लाइसेंस (Illegal Arms License) जारी करने के आरोप से संबंधित मामले में शनिवार को जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में 40 जगहों और राष्ट्रीय राजधानी (Delhi) में छापे मारे। अधिकारियों ने ये जानकारी दी।


CBI के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि शस्त्र लाइसेंस रैकेट से संबंधित एक मामले में चल रही जांच के तहत जम्मू, श्रीनगर, उधमपुर, राजौरी, अनंतनाग, बारामूला और दिल्ली में IAS अधिकारियों, करीब 20 "गन हाउस" सहित लोकसेवकों के दफ्तरों और घरों में छापे मारे गए। PTI के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि कम से कम दो IAS अधिकारियों शाहिद इकबाल चौधरी और नीरज कुमार के परिसरों पर छापेमारी हो रही है।


CBI ने कुपवाड़ा, उधमपुर, किश्तवाड़, शोपियां, राजौरी, डोडो, पुलवामा और कुछ दसरी जगहों के तत्कालीन जिलाधिकारियों और मजिस्ट्रेटों के परिसरों पर दिसंबर 2019 में श्रीनगर, जम्मू, गुरुग्राम और नोएडा समेत एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की थी।


ये सर्च ऑपरेशन 2019 में दर्ज एक मामले के संबंध में चलाया जा रहा है। आरोप है कि 2012 और 2016 के बीच जम्मू कश्मीर के कई जिलों के डिप्टी कमिश्नर (DC) ने पैसों के लालच में फर्जी और अवैध रूप से थोक में शस्त्र लाइसेंस जारी किया था।


CBI ने पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के विभिन्न जिलों में, वहां के जिलाधिकारियों और मजिस्ट्रेट द्वारा कथित तौर पर लगभग दो लाख शस्त्र लाइसेंस जारी करने से संबंधित दो मामलों की जांच के सिलसिले में तलाशी ली थी। आरोप है कि रिश्वत के बदले में गैर कानूनी रूप से ये शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए।


आरोप है कि तत्कालीन लोक सेवकों ने दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर राज्य के गैर निवासियों को नियमों का उल्लंघन कर शस्त्र लाइसेंस जारी किया और रिश्वत ली।


राजस्थान आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने 2017 में इस घोटाले का खुलासा किया था और अवैध रूप से शस्त्र लाइसेंस जारी करने में संलिप्तता के आरोप में 50 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया था। ATS के अनुसार, कथित रूप से सेना के जवानों के नाम पर 3,000 से ज्यादा परमिट दिए गए थे। ATS के निष्कर्षों के आधार पर, जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल एनएन वोहरा ने मामले में जांच का जिम्मा CBI को सौंप दिया था।