'गलवान घाटी विवादास्पद नहीं थी, सरकार को समझना होगा चीन ने क्यों बदली प्राथमिकता'

पूर्व डिफेंस मिनिस्टर एके एंटोनी ने कहा, सरकार यह समझे कि चीन उस इलाके में क्यों घुसी जहां अभी तक कोई विवाद नहीं था
अपडेटेड Jun 25, 2020 पर 15:30  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा विवाद पर देश के पूर्व डिफेंस मिनिस्टर ए के एंटोनी (AK Antony) ने संकेत दिया है कि चीन की प्लान "ज्यादा गहरा" है। उन्होंने कहा कि बीजिंग ने अचानक अपनी प्राथमिकता बदल कर गलवान को चुना जहां अभी तक कोई सीमा विवाद नहीं था। इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में एंटोनी ने कहा, "UPA के दूसरे कार्यकाल में मुझे चीन की प्राथमिकता बदलने का पता चला था। वे देप्सांग (Depsang) और चुमार (Chumar) में वो हमारे इलाकों में घुस आए और काफी मनाने के बाद पीछे लौटे। उस वक्त उनकी प्राथमिकता साउथ चाइन सी (South China Sea) में चल रहा विवाद था। वे इस मामले पर पूरी तरह काबू पाने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें ताइवान, हॉन्गकॉन्ग, झिनझियांग की चिंता थी लेकिन अचानक चीन ने अपनी प्राथमिकता बदल दी"


पूर्व डिफेंस मिनिस्टर ने कहा कि गैर-विवादित इलाकों पर हमला करना अभूतपूर्व था। उन्होंने कहा, "UPA 2 के दौरान जहां भी विवाद हुआ उसके बाद वो अपनी पुरानी पोजीशन पर चले गए। लेकिन अब वो अपनी प्राथमिकता बदल रहे हैं। इसके मायने काफी गहरे हैं जिसका आकलन करना होगा। सरकार को इस कदम की गहराई को समझना होगा।" उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की सरकार के दौरान भारत ने गलवान वैली में निर्माण कार्य शुरू किया था। उन्होंने कहा कि चीन का यह कदम धोखा देने वाला है।


IE का जिक्र करते हुए एंटोनी ने कहा, "पिछले कुछ साल में भारतीय और चीनी सैनिकों ने एक दर्जन से ज्यादा विवादित इलाकों की पहचान की है। लेकिन गलवान वैली विवादित हिस्सा नहीं था। यह भारत की सीमा में है। हमारी संप्रभुता को लेकर कोई विवाद नहीं था। UPI के दूसरे कार्यकाल के दौरान हमने गलवान वैली में सड़क निर्माण का काम शुरू किया था। उस वक्त चीन की तरफ से कोई आपत्ति नहीं थी। अचानक वो बड़ी संख्या में सैनिक तैनात करके भारत की सीमा को पीछे धकेलता है। इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो जाते हैं।"


पूर्वी लद्दाख के गलवान वैली में 15 जून की रात चीन के सैनिकों के साथ हुई झड़प में एक कर्नल सहित भारत के 20 जवान मारे गए। उसके बाद से दोनों पक्षों में मिलिट्री लेवल की बातचीत कई चरणों में हुई है। लेकि चीन एक तरफ सुलह की बात कर रहा है और दूसरी तरफ सीमा पर सैनिक की तैनाती बढ़ा रहा है।


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