वैक्सीन डिलीवरी से लेकर दवाइयों की सप्लाई तक, भारत के पहले मेडिकल ड्रोन का ट्रायल आज से शुरू

ट्रायल के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल दवां पहुंचाने के लिए किया जाएगा
अपडेटेड Jun 18, 2021 पर 14:13  |  स्रोत : Moneycontrol.com

भारत का पहला मेडिकल ड्रोन डिलीवरी ट्रायल आज से बेंगलुरु से लगभग 80 किलोमीटर दूर गौरीबिदनूर में शुरू होने वाला है। बेंगलुरु के थ्रॉटल एयरोस्पेस सिस्टम्स के नेतृत्व में फर्मों के एक एसोसिएशन के नेतृत्व में ट्रायल को मार्च 2020 की शुरुआत में ऑब्जेक्ट डिलीवरी प्रयोगों के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से मंजूरी मिल गई थी। फर्म 18 जून से शुरू होने वाले 30-45 दिनों के लिए पहले सेट का ट्रायल करेगी।


बेयोंड विजुअल लाइन ऑफ साइट (BVLOS) मेडिकल ड्रोन का आज से ट्रायल शुरू होगा। बेंगलुरू की थ्रॉटल एयरोस्पेस सिस्टम्स (TAS) को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की तरफ से पिछले साल मार्च में ऑब्जेक्ट डिलीवरी ट्रायल के लिए मंजूरी मिल गई थी। हालांकि, कोरोना महामारी के कारण एजेंसियों से कुछ अन्य अनुमतियों में देरी हुई।


मशहूर कार्डियक सर्जन डॉ देवी शेट्टी ने इन ट्रायल का समर्थन किया है। टीएएस और नारायण हेल्थ दवा डिलिवरी के लिए पार्टनरशिप करेंगे। ट्रायल के दौरान ड्रोन का इस्तेमाल दवां पहुंचाने के लिए किया जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस कंसोर्टिम में टीएएस के अलावा, इनवोली-स्विस भी शामिल है। इनवोली-स्विस पेशेवर ड्रोन एप्लिकेशन के लिए एयर ट्रैफिक अवेयरनेस सिस्टम में माहिर है।


रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें हनीवेल एयरोस्पेस एक सेफ्टी एक्सपर्ट के रूप में है। कंसोर्टियम दो तरह के ड्रोन का प्रयोग करेगा। इनमें एक मेडकॉप्टर और टीएएस शामिल है। ऑन-डिमांड डिलीवरी सॉफ्टवेयर को रैंडिंट (RANDINT) नाम दिया गया है। सरकार पहले से ही दूर-दराज के क्षेत्रों और दुर्गम क्षेत्रों में अंतिम-मील कवरेज सुनिश्चित करने के लिए कोरोना वैक्सीन की डिलीवरी के लिए ड्रोन के उपयोग पर विचार कर रही है।


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