भारत G7 देशों के ग्लोबल डिजिटल टैक्स प्रपोजल को मानने से कर सकता है इनकार, जानें इसकी वजह

मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनियों पर ग्लोबल डिजिटल टैक्स लगाने के G7 के प्रस्ताव को भारत मानने से इनकार कर सकता है
अपडेटेड Jun 11, 2021 पर 08:02  |  स्रोत : Moneycontrol.com

बड़ी मल्टीनेशनल टेक्नोलॉजी कंपनियों पर ग्लोबल डिजिटल टैक्स (Global Digital Tax) लगाने के जी7 देशों (G7 Countries) के प्रस्ताव को भारत मानने से इनकार कर सकता है। G7 देशों नेके बीच 5 जून को ऐतिहासिक ग्लोबल कॉर्पोरेट टैक्स पर सहमति बनी थी, जिसमें कहा गया था कि मल्टीनेशनल कंपनियों को उस देश में टैक्स का भुगतान करना होगा, जहां वह ऑपरेट करती हैं।

इसके साथ ही G7 देशों के बीच बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों पर टू पिलर (2 Pillar) स्ट्रैटजी के तहत ग्लोबल डिजिटल टैक्स लगाने पर भी सहमति बनी थी। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत G7 देशों के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगी, क्योंकि इससे देश को इन कंपनियों से मिलने वाले टैक्स में काफी कमी आ जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल डिजिटल टैक्स का फायदा अमेरिका जैसे देशों को होगा, जहां अधिकतक मल्टीनेशनल कंपनियों का हेडक्वार्टर है। भारत समेत कई विकसित देश बड़ी ग्लोबल डिजिटल कंपनियों पर टैक्स लगाने के लिए काफी समय से संघर्ष कर रहे हैं जो भारत जैसे बड़े डेटा कंजम्पशन वाले देशों से मोटा मुनाफा कमाते हैं।

G7 देशों ने यह प्रस्ताव दिया

5 जून को G7 देशों ने प्रस्ताव दिया कि बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां केवल उन देशों को टैक्स नहीं देगी जहां वे स्थित हैं, बल्कि उन देशों को भी टैक्स चुकाएगी जहां वह काम करती हैं। इस प्रस्ताव के मुताबिक, ग्लोबल टेक कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन का 10% टैक्स के रूप में उन देशों को भुगतान करेंगी, जहां ये कंपनियां ऑपरेट करती हैं।

लेकिन इसमें यह शर्त रख दी गई कि इन कंपनियोंके 10% मार्जिन के ऊपर जो भी 20% प्रॉफिट होगा उसे दोबार एलोकेट किया जाएगा और जिस देश में कंपनी ऑपरेट कर रही है, वहां इसके बाद इस आधार पर टैक्स लगेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसी वजह से भारत जैसे देशों को मिलने वाली टैक्स प्रॉफिट काफी कम हो जाएगा।

टैक्स एजवायजरी फर्म Dhruva Advisors के सीईओ दिनेश कनाबर का कहना है कि G7 के इस डिजिटल टैक्स प्रस्ताव में उन देशों को प्रॉफिट का मामूली हिस्सा मिलेगा जहां से इन कंपनियों ने मोटा मुनाफा कमाया है। इसलिए हो सकता है कि भारत इस प्रस्ताव को मामने से इनकार कर दे। उन्होंने कहा कि देखते हैं G20 समिट में भारत इस पर क्या रुख अपनाता है।

इसी तरह CBDT के सदस्य रहे अखिलेश रंजन ने कहा कि G20 समिट में भारत यह संकेत दे देगी कि ग्लोबल डिजिटल टैक्स पर उसका क्या रुख है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को मानने से भारत के साथ कुछ अफ्रीका देश इनकार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस ग्लोबल डिजिटल टैक्स पर देशों के बीच एक राय बनना मुश्किल है और अगर ऐसा होता भी है तो इसे ग्लोबल समझौता बनने में काफी समय लगेगा।

आपको बता दें कि कई सालों की मशक्कत और बातचीत के बाद G7 देश मिनिमम ग्लोबल कॉर्पोरेशन टैक्स (Minimum Global Corporation Tax) रेट को न्यूनतम 15% पर रखने पर सहमत हुए हैं। इस समझौते के मुताबिक, ग्लोबल कॉर्पोरेट टैक्स कम से कम 15% होगा।

साथ ही टैक्स का भुगतान जिस देश में व्यापार किया जा रहा है, वहां करना होगा। दरअसल, विकसित देशों को गूगल, एमेजॉन, फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों से बहुत कम टैक्स मिलता है। इसलिए G7 देशों ने यह समझौता किया है। जी7 देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल है।

सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।