भारत में लागू कृषि कानूनों में किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता, सामाजिक सुरक्षा की जरूरत: IMF

ग्लोबल वित्तीय संस्थान की मुख्य अर्थशास्त्री ने मंगलवार को कहा कि ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है
अपडेटेड Jan 27, 2021 पर 22:17  |  स्रोत : Moneycontrol.com

इंटरनेशनल मोनेटरी फंड यानी IMF (International Monetary Fund) की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ (Gita Gopinath) ने कहा कि भारत में हाल में लागू कृषि कानूनों (New Farm Laws) में किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता है, लेकिन साथ ही कमजोर किसानों को सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि को सुधारों की जरूरत है। वाशिंगटन स्थित वैश्विक वित्तीय संस्थान (Global Financial Institution) की मुख्य अर्थशास्त्री ने मंगलवार को कहा कि ऐसे कई क्षेत्र हैं, जहां सुधार की जरूरत है।


देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल सितंबर में तीन नए कृषि कानूनों को लागू किया था, और इन्हें कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया गया है, जो बिचौलियों को दूर करेगा और किसानों को देश में कहीं भी अपनी उपज बेचने की आजादी देगा। गोपीनाथ ने नए कृषि कानूनों पर एक सवाल के जवाब में कहा कि ये कृषि कानून खासतौर से मार्केटिंग क्षेत्र से संबंधित हैं। इनसे किसानों के लिए बाजार बड़ा हो रहा है। अब वे बिना कर चुकाए मंडियों के अलावा कई स्थानों पर भी अपनी पैदावार बेच सकेंगे। और हमारा मानना है कि इसमें किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता है।


उन्होंने कहा कि जब भी कोई सुधार किया जाता है, तो उससे होने वाले बदलाव की एक कीमत होती है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे कमजोर किसानों को नुकसान न पहुंचे। यह सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराई जा सकती है। अभी एक फैसला किया गया है और देखना होगा कि इसका क्या नतीजा सामने आता है। बता दें कि हजारों किसान नए कृषि कानूनों का पिछले दो महीने से विरोध कर रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं।


इस सिलसिले में किसान संगठनों की सरकार के साथ 11 दौर की बातचीत भी हो चुकी है, हालांकि अबतक उसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। इस बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस (Republic Day Violence) के दिन किसान संगठनों की ट्रैक्टर परेड के नाम पर हुए शर्मनाक उपद्रव के बाद अब देश भर से उपद्रवकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग हो रही है।


26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के लिए निर्धारित मार्ग से हटकर प्रदर्शनकारी किसानों का एक ग्रुप मंगलवार को दिल्ली के लालकिले में घुस गया और राष्ट्रीय राजधानी स्थित इस ऐतिहासिक स्मारक के कुछ गुंबदों पर झंडे लगा दिए। पूरा किसान आंदोलन उपद्रवियों की लाल किले के उस स्थान पर अपना झंडा फहराने से कठघरे में आ गया है, जहां हर साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री झंडा फहराते है।


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