China को झटका देने की तैयारी, भारत-ताइवान के बीच हो सकती है ट्रेड वार्ता, टेक्नोलॉजी में बढ़ेगा निवेश

भारत और ताइवान के बीच जल्द ही ट्रेड वार्ता होने की उम्मीद की जा रही है, अगर ऐसा होता है तो यह साफ हो जाएगा कि भारत अब चीन की वन चाइना पॉलिसी को नहीं मानता है
अपडेटेड Oct 21, 2020 पर 08:25  |  स्रोत : Moneycontrol.com

एक तरफ भारत और चीन के बीच लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में एलएसी (LAC) पर तनाव (India-China standoff) जारी है तो वहीं दूसरी तरफ चीन और ताइवान के संबंध (China-Taiwan relations) अब तक के सबसे खराब दौर में हैं और दोनों देशों के बीच युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में एक बड़ी पुरानी कहावत है, दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। कुछ इसी तर्ज पर भारत और ताइवान एक-दूसरे के नजदीक आ रहे हैं और दोनों देशों के बीच जल्द ही ट्रेड वार्ता (Trade Talks) होने की उम्मीद है। अगर ऐसा होता है तो यह चीन के लिए बड़ा झटका साबित होगा। इससे यह साफ हो जाएगा कि भारत अब चीन की वन चाइना पॉलिसी (One China policy) को नहीं मानता है।

एक‍ रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत सरकार जल्‍द ही ताइवान के साथ ट्रेड वार्ता कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो फिर यह चीन के लिए बड़ा झटका होगा। ताइवान पिछले कई वर्षों से भारत के साथ व्‍यापार वार्ता करना चाहता था, लेकिन भारत इस तरह के कदम से बचता आ रहा था। भारत बिना वजह चीन के साथ किसी भी जटिल स्थिति में नहीं पड़ना चाहता था। भारत को लगता था कि अगर भारत और ताइवान के बीच व्यापार संधि का रजिस्ट्रेशन WTO में होता है तो दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ जाएगा। लेकिन अब बॉर्डर पर लगातार चीन की सेना आक्रामक है, ऐसे में सूत्रों ने कहा कि मोदी सरकार अपनी नीति को बदल सकती है।

सरकार का अंदर उठ रही मांग

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, केंद्र सरकार के अंदर इस बात की आवाज अब उठने लगी है कि ताइवान के साथ ट्रेड के लिए वार्ता करनी चाहिए। सरकार में कुछ लोग मानते हैं कि दोनों देशों के रिश्‍ते चीन के साथ काफी बिगड़ चुके हैं। यह समय की मांग है कि चीन को उसके ही तरीके से जवाब दिया विशेषज्ञों का कहना है कि ताइवान के साथ होने वाली ट्रेड डील भारत को तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्‍स के क्षेत्र में होने वाले बड़े निवेश के लक्ष्‍य को पूरा करने में मदद करेगी। हालांकि अभी तक इस विषय पर कोई भी फैसला नहीं लिया गया है।

ताइवान की तीन कंपनियों को मंजूरी

इसी महीने मोदी सरकार ने देश में अगले पांच साल में स्मार्टफोन प्रोडक्शन के लिए 10 लाख 50 हजार करोड़ रुपये जुटाने के मकसद से ताइवान के फॉक्‍सकॉन टेक्‍नोलॉजी ग्रुप (Foxconn Technology Group) के साथ विस्‍ट्रॉन कॉर्प (Wistron Corp) और पेगाट्रॉन कॉर्प (Pegatron Corp) को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार देश में कम से कम से 10.5 अरब रुपए के निवेश को स्‍मार्ट फोन उत्‍पादन के जरिए आकर्षित करना चाहती है। हालांकि भारत और ताइवान के बीच ट्रेड वार्ता के संबंध में दोनों सरकारों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

दोनों देशों के बीच बढ़ा व्यापार

अगर भारत और ताइवान के बीच ट्रेड समझौता होता है तो यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा। भारत के साथ औपचारिक ट्रेड वार्ता का मतलब होगा ताइवान के लिए दुनिया की बड़ी अर्थव्‍यस्‍थाओं के साथ बातचीत के दरवाजे खुलना। ऐसे देश जो चीन से परेशान हैं, वे ताइवान में चीन का हल तलाश सकते हैं। वाणिज्‍य मंत्रालय के मुताबिक भारत और ताइवान के बीच साल 2019 में व्‍यापार 18 प्रतिशत बढ़कर 7.2 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है।

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