Coronavirus Vaccine सप्लाई में क्यों नहीं बराबरी? जनसंख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा गुजरात को मिलीं खुराक

दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के अस्पतालों में या तो वैक्सीन की खुराक खत्म हो गई हैं या बस कुछ दिनों की खुराक बाकी है
अपडेटेड Apr 17, 2021 पर 10:56  |  स्रोत : Moneycontrol.com

जहां एक तरफ देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) का प्रकोप अपनी दूसरी लहर में बढ़ता जा रहा है, तो वहीं कई राज्यों से वैक्सीन (Vaccine) की कमी की खबरें भी सामने आ रही हैं। अब ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या हर राज्य के लिए वैक्सीन सप्लाई की मात्रा तय करने के तरीके में कोई समस्या है? और वास्तव में ये कैसे किया जाता है? COVID-19 की दूसरी लहर पूरे देश में उग्र होने के बाद इन सवालों को हवा दी जा रही है।  


दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के अस्पतालों में या तो वैक्सीन की खुराक खत्म हो गई हैं या बस कुछ दिनों की खुराक बाकी है। भारत सरकार का तर्क है कि ये मुद्दा सप्लाई का नहीं है, बल्कि योजना बनाने का है।


स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने 14 अप्रैल को कार्यप्रणाली के बारे में बताते हुए कहा, "हम बड़े राज्यों को चार दिनों की सप्लाई दे रहे हैं और हर चार से पांच दिनों में इसकी भरपाई कर रहे हैं। छोटे राज्यों को सात से आठ दिनों की वैक्सीन की सप्लाई मिलती है, जो इस समय सीमा के पूरा होने के बाद फिर से भेज दी जाती है। राज्य सरकारों को डेली बेसीस पर डोज का स्टेटस देखने की जरूरत है, ठीक उसी तरह जैसे हम हर दिन स्वास्थ्य मंत्रालय में करते हैं।"


अब यहां लेकिन एक बात अभी भी साफ नहीं हुई कि आखिरकार हर एक राज्य के लिए एक दिन की सप्लाई की गणना कैसे की जाती है? क्या ये प्रक्रिया सभी राज्यों के लिए एक है या फिर हर राज्य के लिए अलग-अलग प्रोसेस अपनाया जाता है।


भूषण ने जो कहा, उससे सभी राज्य सहमत नहीं हैं। उदाहरण के लिए, छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने 14 अप्रैल को एक प्रिंट रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि राज्य को पिछले एक सप्ताह में दो से तीन दिनों के भीतर ताजा खुराक का वादा करने के बावजूद सप्लाई नहीं मिली है।


इस बीच दो सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों दिल्ली और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ज्यादा सप्लाई के लिए अपनी मांगों पर मुखर रहे हैं। इसके बावजूद महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा खुराक मिलने का सिलसिला शुरू हुआ।


मांग और आपूर्ति के बीच गलत मिलान का एक संभावित कारण ये भी होगा कि हर एक राज्य को भेजी की गई खुराक उनकी जनसंख्या के अनुसार नहीं हो सकती है। इसे और बेहतर तरीके से समझने के लिए, मनीकंट्रोल ने भारत के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सप्लाई की गई कुल खुराक के आंकड़ों को देखा और इसकी तुलना उनकी आबादी से की।


इस स्टडी में आबादी का वो प्रतिशत भी देखा, जिसे कम से कम पहली खुराक मिली है। बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का डेटा मौजूद नहीं था। ये डेटा काई सोर्स से लिया गया है। वैक्सीन का डेटा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट से लिया गया था।


डेटा के मुताबिक, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा मामले आ रहे हैं और वैक्सीन सप्लाई भी सबसे ज्यादा इसी को की जा रही है। जब कोई अपनी आबादी को ध्यान में रखता है तो तस्वीर बदल जाती है। 8 अप्रैल को महाराष्ट्र की वैक्सीन सप्लाई वहां की लगभग 8.5 प्रतिशत आबादी को कवर कर गई। दिल्ली के लिए ये आंकड़ा 10.4 प्रतिशत था।


दूसरी तरफ गुजरात, जिसे सबसे आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य के रूप में नहीं माना जा सकता है, उसे अपनी आबादी के 16.4 प्रतिशत हिस्से के लिए पर्याप्त वैक्सीन मिली थी, जो कि दूसरे राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा थी।


इसके बाद दूसरे नंबर पर केरल को मिली वैक्सीन उसकी 16.1 प्रतिशत आबादी को कवर करती है और छत्तीसगढ़ 15.8 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर आता है। देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में से उत्तर प्रदेश और बिहार का नाम इस लिस्ट में सबसे नीचे है।


भारत में COVID-19 मामलों पर नजर रखने वाले एक पर्यवेक्षक ने कहा, "डेटा से साफ पता चलता है कि खुराक वितरित करने में तर्क या निरंतरता की कमी है। इसलिए महाराष्ट्र का आवाज उठाना सही था और वो उसका अधिकारी था।"


सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।