Locust Attack: टिड्डी के आतंक से किसान बर्बादी के कगार पर, करोड़ों टिड्डियां पहुंची भारत

देश के अलग-अलग राज्यों में टिड्डियों के हमले से करीब सवा लाख एकड़ खेती को नुकसान पहुंच चुका है
अपडेटेड May 31, 2020 पर 13:04  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पूरी दुनिया जहां कोरोना काल से जूझ रही है, वहीं भारत का एक हिस्सा बिन बुलाए मेहमान टिड्डियों के आतंक से जूझ रहा है। पाकिस्तान के रास्ते भारत की सीमा में घुसा टिड्डी दल राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड समेत कई राज्यों को अपनी चपेट में ले चुका है। अनुमान जताया जा रहा है कि करोड़ों की संख्या में टिड्डी दल भारत में प्रवेश कर चुका है। जिससे लाखों एकड़ खेतों की फसल चौपट हो सकती है।


कहां से आया टिड्डी दल


टिड्डियों का दल ईस्ट अफ्रीका के सींग (अफ्रीका का सींग, पूर्वी अफ्रीका का एक प्रायद्वीप है जो अरब सागर में सैकड़ों किलोमीटर तक फैला है और अदन की खाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। मैप में यह सींग के समान लगता है इसी लिए इसे यह नाम दिया गया है।) से होते हुए यमन तक पहुंचा। इसके बाद इसने ईरान और पकिस्तान को निशाना बनाया। अब यह पाकिस्तान के रास्ते से भारत में प्रवेश कर चुका है। पाकिस्तान में कपास की कई हेक्टेयर खेती को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। जून 2019 में ईरान से पाकिस्तान टिड्डियों का दल पहुंचा था। यहां पर इस दल ने गेहूं, कपास और मक्का जैसी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।


भारत में आने का समय


आमतौर पर भारत में टिड्डी जून महीने में आते हैं। इस समय गर्मियों की फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन इस बार टिड्डियों का दल अप्रैल महीने में ही भारत में प्रवेश कर गया। जानकारों का मानना है कि बरसात शुरू होने तक ये भारत में आते रहेंगे।


नुकसान


टिड्डी दल भले ही एक कीड़ा आसमान में उड़ रहा है। लेकिन यह फसल को बहुत नुकसान पहुंचा रहा है। अलग-अलग राज्यों में टिड्डियों के हमले से करीब सवा लाख एकड़ खेती को नुकसान पहुंच चुका है। करीब 8 करोड़ टिड्डियां भारत में प्रवेश कर चुकी हैं। यह 35 हजार लोगों के हिस्से का अनाज खा सकता है। इन टिड्डी दलों से भारत में करोड़ों रुपये की फसल भारी नुकसान पहुंच सकता है।


टिड्डियों की उम्र


टिडि्डयों का जीवन आमतौर 3 से 6 महीने का होता है। नमी वाले इलाकों में ये एक बार में 20 से 200 तक अंडे देती हैं। जो 10 से 20 दिन में फूटते हैं। शिशु टिड्डी पेड़-पौधे खाती हैं, 5-6 हफ्ते में ये बड़ी हो जाती हैं। इन्हें मारने का सबसे बेहत उपाय अंडों के फूटते समय उन रसायन का छिड़काव कर दें। टिड्डी अपने वजन से कहीं अधिक भोजन एक दिन में खाती है। ये उड़ान भरने में काफी सक्षम होते हैं, इसलिए एक दिन में ये करीब 150-200 किमी दूर पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि देश के प्रभावित राज्यों में इसे पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा।


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