UP के पूर्व CM अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट JP सेंटर को बेचने की तैयारी में योगी सरकार

इसकी वर्तमान कीमत 1642.83 करोड़ रुपए तय की गई है
अपडेटेड Sep 24, 2020 पर 18:25  |  स्रोत : Moneycontrol.com

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath government) राजधानी लखनऊ (Lucknow) में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Former CM Akhilesh Yadav) के ड्रीम प्रोजेक्ट (Dream Project) जेपी सेंटर (JP Centre) को बेचने की तैयारी कर चुकी है। जेपी सेंटर बेचने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने उत्तर प्रदेश शासन को प्रस्ताव भेजा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी वर्तमान कीमत 1642.83 करोड़ रुपए तय की गई है। जेपी सेंटर (Jai Prakash Narayan International Centre) का निर्माण अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पिछली Samajwadi Party (SP) सरकार के दौरान शुरू हुआ था।


इसके निर्माण पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 881.36 करोड़ खर्च हो चुके हैं। वर्तमान में, परियोजना को पूरा करने के लिए अभी 130.60 करोड़ रुपए की और जरूरत है। योगी सरकार ने तत्कालीन सपा शासन द्वारा निर्धारित बजट में ही इस सेंटर के बचे काम को पूरा करने के लिए कहा था, लेकिन LDA (Lucknow Development Authority) ने इसमें असमर्थता जताई थी और अधिक धनराशि खर्च की है। अब LDA ने यूपी सरकार को इसे बेचने का प्रस्ताव भेजा है।


इस JP सेंटर में  5 सितारा सुविधाएं हैं, जिसमें गेस्ट हाउस, डॉरमेट्री, हेल्थ सेन्टर, रेस्टोरेंट, स्विमिंग पूल और हेलिपैड भी है। इसमें 2000 लोगों की क्षमता का हॉल है, वहीं 1000 क्षमता वाला ऑडिटोरियम है। इसके अलावा जेपी सेंटर के गेस्ट हाउस में 103 लग्जरी कमरे, 7 सूट, हेल्थ सेंटर, रेस्टोरेंट, 7 फुट बाहर लटकता स्विमिंग पूल और हेलीपैड है। इनके अलावा, कई प्रमुख सेमिनार हैं। इस सेंटर का निर्माण कुल 75 हजार से ज्यादा वर्गमीटर में किया गया है। योगी सरकार अब अखिलेश यादव के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बेचने की तैयारी कर रही है।


जेपी सेंटर को बेचने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। बता दें कि 2012 से 2017 के बीच JP सेंटर का निर्माण किया गया था। हालांकि, अब इस मसले पर सियासत शुरू हो गई है। SP के पूर्व मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिषेक मिश्रा ने कहा कि वर्तमान सरकार पिछली सरकारों द्वारा बनाई गई इमारतों को बेचने की कोशिश कर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर फिर से विचार करना चाहिए।


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