Coronavirus Impact: 20 लाख करोड़ का पैकेज लाएगी सरकार, अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

पीएम ने कहा, हमें अपनी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाना होगा ताकि छोटे-मझोले उद्योगों की मदद हो सके
अपडेटेड May 13, 2020 पर 15:28  |  स्रोत : Moneycontrol.com

पीएम मोदी ने जब रात 8 बजे देश को संबोधित करना शुरू किया तो सब राहत पैकेज की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन यह किसी को अंदाजा नहीं था कि पीएम 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान करेंगे। यह देश की GDP का 10 फीसदी है। ऐसा पहली बार हुआ है जब देश में इतना बड़ा राहत पैकेज दिया गया है।


पीएम ने कहा, "कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज, "आत्मनिर्भर भारत अभियान" की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा।" पीएम ने कहा, हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थीं, जो रिजर्व बैंक के फैसले थे, और आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है, उसे जोड़ दें तो ये करीब-करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है। इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का सपोर्ट मिलेगा।  20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को आत्मनिर्भर भारत अभियान को एक नई गति देगा।


अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने पर ज़ोर


आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करने के लिए, इस पैकेज में Land, Labour, Liquidity और   Laws, सभी पर बल दिया गया है। ये आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मंझोले उद्योग, हमारे MSME के लिए है। जो करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है, जो आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि ये आर्थिक पैकेज देश के उस श्रमिक के लिए है, देश के उस किसान के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिन रात परिश्रम कर रहा है। ये आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है, जो ईमानदारी से टैक्स देता है, देश के विकास में अपना योगदान देता है।


पीएम ने कहा, "आपने भी अनुभव किया है कि बीते 6 वर्षों में जो Reforms हुए, उनके कारण आज संकट के इस समय भी भारत की व्यवस्थाएं अधिक सक्षम, अधिक समर्थ नज़र आईं हैं। आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता, ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी स्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है। ये संकट इतना बड़ा है, कि बड़ी से बड़ी व्यवस्थाएं हिल गई हैं। लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमने, देश ने हमारे गरीब भाई-बहनों की संघर्ष-शक्ति, उनकी संयम-शक्ति का भी दर्शन किया है। आज से हर भारतवासी को अपने लोकल के लिए "वोकल" बनना है।


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