Nuclear Weapon Ban Treaty: भारत का परमाणु-हथियार निषेध संधि का समर्थन करने से इनकार, कहा- हम इससे बाध्य नहीं

भारत ने कहा कि वह परमाणु-हथियार निषेध संधि का समर्थन नहीं करता और इससे उत्पन्न होने वाले दायित्वों के लिए बाध्य नहीं है
अपडेटेड Jan 24, 2021 पर 14:34  |  स्रोत : Moneycontrol.com

संयुक्त राष्ट्र की पहल पर परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली पहली संधि (Nuclear Weapon Prohibition Treaty) प्रभावी हो गई है। लेकिन इस संधि को भारत का समर्थन नहीं मिला है। भारत ने कहा कि वह परमाणु-हथियार निषेध संधि (Nuclear Weapon Ban Treaty) का समर्थन नहीं करता और इससे उत्पन्न होने वाले किसी भी दायित्वों के लिए बाध्य नहीं है। आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र जनरल एसेंबली ने इस संधि को जुलाई 2017 में मंजूरी दी थी, जिसे 120 से अधिक देशों ने समर्थन दिया था। यह अब अंतरराष्ट्रीय कानून का हिस्सा है। विश्व को विनाशकारी शस्त्रों से बचाने की इस पहल को ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है।

हालांकि, इस Treaty को भारत सहति परमाणु हथियारों से लैस या जिनके पास इसके होने की संभावना है, किसी भी देश ने समर्थन नहीं दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत यूनिवर्सल, बिना भेदभाव वाले और सत्यापन योग्य परमाणु निरस्त्रीकरण (nuclear disarmament) के लिए प्रतिबद्ध है और इसे प्राथमिकता देता है। लेकिन यह संधि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के विकास में कोई योगदान नहीं करेगा और न ही यह कोई मानक तय कर रहा है। मंत्रालय ने कहा, जहां तक परमाणु हथियार निषेध संधि का सवाल है तो भारत ने इस संधि पर बातचीत में हिस्सा नहीं लिया और हमने लगातार यह स्पष्ट किया है कि भारत इस संधि का हिस्सा नहीं है।

इन देशों नें नहीं किया Treaty का समर्थन

जिन देशों ने Nuclear Weapon Ban Treaty का समर्थन नहीं किया था उनमें भारत, अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल शामिल हैं। इन 9 देशों के साथ 30 देशों के संगठन नाटो (NATO) ने भी इसका समर्थन नहीं किया था। परमाणु हमले की विभीषिका झेल चुके दुनिया के एकमात्र देश जापान ने भी इस संधि का समर्थन नहीं किया है।

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