जिस हमले का जिक्र करते हुए भावुक हुए PM, उसी के पीड़ितों के सामने गुलाम नबी के भी नहीं रुके थे आंसू

पीएम मोदी के विदाई भाषण के बाद गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर में 2007 के आतंकवादी हमले को याद किया
अपडेटेड Feb 09, 2021 पर 17:55  |  स्रोत : Moneycontrol.com

राज्यसभा (RajyaSabha) में विपक्ष के नेता और कांग्रेस (Congress) के दिग्गज गुलाम नबी आजाद (Ghulam Nabi Azad) ने सांसदों को भावुक करते हुए ऊपरी सदन से एक मार्मिक भाषण के साथ विदाई ली। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2007 में जम्मू-कश्मीर में गुजरात के यात्रियों पर हुए हमले की घटना का जिक्र करते हुए, उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी के साथ फोन पर हुईं बातचीत के बारे में बताते हुए भावुक हो गए।


पीएम मोदी के विदाई भाषण के बाद आजाद ने कश्मीर में 2007 के आतंकवादी हमले को याद किया, जब जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान गुजरात से पर्यटकों को ले जाने वाली एक बस पर ग्रेनेड से हमला किया गया था। उन्होंने भावनात्मक रूप से बताया कि कैसे पीड़ितों के परिवारों और बच्चों के सामने पूर्व सीएम ने आंसू बहाए। आजाद ने कहा, "मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि इस देश में उग्रवाद और आतंकवाद समाप्त हो।"


संसद में आज के भावुक पलों के तुरंत बाद न्यूज एजेंसी ANI ने अगस्त 2007 का एक पुरानी वीडियो भी ट्वीट किया। इस वीडियो में दिखाया कि कैसे ग्रेनेड हमले में पीड़ित परिवारों के सामने गुलाम नबी आजाद खुद को रोक नहीं पाए और उनके भी आंसू बह गए। वीडियो में आजाद रोते हुए कहते हैं, "आप यहां से फलों और सूखे मेवा के साथ लौटने वाले थे, लेकिन अब आप अपने बच्चों के शवों के साथ घर वापस जा रहे हैं। इसके लिए मैं आप सब से माफी मांगता हूं।"


गुलाम नबी आजाद, जिनका राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल 15 फरवरी को खत्म हो रहा है, वे 28 सालों से ऊपरी सदन के सदस्य हैं। वह 10 साल तक लोकसभा के सदस्य रहे और तीन साल तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे।


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए आजाद ने कहा, "विपक्ष मुद्दों पर लड़ाई नहीं रख सकता। मैंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से उनके नेता प्रतिपक्ष के कार्यकाल के दौरान काफी कुछ सीखा। जब वाजपेयी जी LoP थे, तो सदन बहुत आराम से चलता था। जनता ने हमें उनके लिए कानून बनाने के लिए चुना। अगर हम बहस करते रहे, तो ये कानून पारित नहीं होंगे। मैंने अटल जी से बहुत कुछ सीखा, कैसे गतिरोध को तोड़ना है, कैसे सदन को चलाना है।”


आजाद का राजनीतिक जीवन


1973 में कांग्रेस में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले आजाद ने 27 अक्टूबर, 2005 तक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री के रूप में कार्य किया है, जब उन्हें जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 2002 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया।


1984 में आजाद आठवीं लोकसभा के लिए चुने गए और 1990 से 1996 तक महाराष्ट्र से राज्यसभा के सदस्य रहे। वह 30 नवंबर, 1996 से 29 नवंबर, 2002 और 30 नवंबर, 2002 से 29 नवंबर, 2008 के कार्यकाल के दौरान जम्मू और कश्मीर से उच्च सदन के लिए चुने गए। 2 नवंबर, 2005 को जम्मू और कश्मीर राज्य के सीएम बनने के बाद उन्होंने 29 अप्रैल, 2006 को इस्तीफा दे दिया।


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