पीएम मोदी ने किया India Toy Fair 2021 का उद्घाटन, कहा खिलौनों में आत्मनिर्भर बनें भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह 11 बजे द इंडिया टॉय फेयर 2021 का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उद्घाटन किया है।
अपडेटेड Feb 28, 2021 पर 10:55  |  स्रोत : Moneycontrol.com

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह 11 बजे द इंडिया टॉय फेयर 2021  (India Toy Fair 2021) का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये उद्घाटन किया है। देसी खिलौनों को बढ़ावा देने के मकसद से आयोजित ये वर्चुअल मेला 4 दिन तक चलेगा।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वो पहले चतुरंग या चादुरंगा के रूप में भारत में खेला जाता था। आधुनिक लूडो तब पच्चीसी के रुप में खेला जाता था। हमारे धर्मग्रन्थों में भी बाल राम के लिए अलग-अलग कितने ही खिलौनों का वर्णन मिलता है।


पीएम मोदी ने कहा कि सिंधुघाटी सभ्यता, मोहनजो-दारो और हड़प्पा के दौर के खिलौनों पर पूरी दुनिया ने रिसर्च की है। प्राचीन काल में दुनिया के यात्री जब भारत आते थे, तो भारत में खेलों को सीखते भी थे और अपने साथ लेकर भी जाते थे।


पीएम ने कहा कि रीयूज और रीसायकलिंग जिस तरह से भारतीय जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं, वही हमारे खिलौनों में भी दिखता है। ज्यादातर भारतीय खिलौने प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल चीजों से बनते हैं, उनमें इस्तेमाल होने वाले रंग भी प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं।


पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि हमारे यहां खिलौने ऐसे बनाए जाते थे, जो बच्चों के चहुंमुखी विकास में योगदान दें। आज भी भारतीय खिलौने आधुनिक फैंसी खिलौनों की तुलना में कहीं सरल और सस्ते होते हैं, सामाजिक-भौगोलिक परिवेश से जुड़े भी होते हैं।


उन्होंने आगे कहा आज मैं देश के खिलौना निर्माताओं से भी अपील करना चाहता हूं कि आप ऐसे खिलौने बनाएं जो इकॉलजी और साइकॉलजी दोनों के लिए बेहतर हों। क्या हम ये प्रयास कर सकते हैं कि खिलौनों में कम से कम प्लास्टिक का उपयोग करें। ऐसी चीजों का उपयोग करें जिन्हें रिसायकिल कर सकते हैं।


पीएम ने आगे कहा कि खिलौनों के क्षेत्र में भारत के पास परंपरा भी है और प्रौद्योगिकी भी है, भारत के पास अवधारणाएं भी हैं। हमारे सॉफ्टवेयर इंजीनियर कंप्यूटर गेम के जरिए भारत की कहानियों को दुनिया तक पहुंचा सकते हैं।


पीएम ने कहा कि अब देश ने खिलौना उद्योग को 24 प्रमुख क्षेत्रों में दर्जा दिया है.। राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना भी तैयार हो गई है। इसमें 15 मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है ताकि ये उद्योग प्रतिस्पर्धी बने, देश के खिलौनों में आत्मनिर्भर बनें और भारत के खिलौने दुनिया में भी जाएं।


मोदी ने कहा कि अगर आज मेड इन इंडिया की मांग है तो आज भारत में हस्तनिर्मित की मांग भी उतनी ही बढ़ रही है।  आज लोग खिलौनों को केवल एक उत्पाद के रूप में ही नहीं खरीदते हैं बल्कि उस खिलौने से जुड़े अनुभव से भी जुड़ना चाहते हैं। इसलिए हमें हस्तनिर्मित भारत में भी बढ़ावा देना है।


बता दें कि आत्मनिर्भर भारत अभियान में वोकल फॉर लोकल के तहत देश को खिलौना निर्माण का वैश्विक हब बनाने के मकसद से शिक्षा मंत्रालय, महिला व बाल विकास मंत्रालय और कपड़ा मंत्रालय मिलकर इसका आयोजन करवा रहे हैं। भारत खिलौना मेला के लिए अभी तक 10 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं।


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