गिरफ्तार जर्नलिस्ट राजीव शर्मा China को बेचता था गोपनीय जानकारी, हर Information के लिए मिलते थे 1000 डॉलर

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के DCP संजीव यादव ने कहा कि राजीव शर्मा के पास से रक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेज मिले हैं
अपडेटेड Sep 21, 2020 पर 07:13  |  स्रोत : Moneycontrol.com

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में दिल्ली के पीतमपुरा इलाके से फ्रीलांस जर्नलिस्ट राजीव शर्मा को 14 सितंबर गिरफ्तार किया था। अब इस संबंध में एक चीनी महिला किंग शी और उसके नेपाली सहयोगी शेर सिंह को भी हिरासत में लिया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के DCP संजीव यादव ने कहा कि राजीव शर्मा के पास से रक्षा संबंधी गोपनीय दस्तावेज मिले हैं। पुलिस का दावा है कि राजीव के पास से डिफेंस से जुड़े कुछ बेहद सीक्रेट डॉक्यूमेंट बरामद हुए हैं। राजीव शर्मा पर आरोप है कि वह गोपनीय जानकारी चीनी खुफिया अधिकारियों को बेच रहे थे। किंग शी और शेर सिंह ने शेल कंपनियों के जरिए राजीव को काफी पैसे दिए थे। इसके एवज में वह चीन को रक्षा संबंधी खुफिया जानकारी दे रहे थे।

पूछताछ और जांच के आधार पर दिल्ली पुलिस का कहना है कि पत्रकार राजीव शर्मा ने चीनी खुफिया को संवेदशील जानकारी मुहैया कराई है। पुलिस ने बताया कि राजीव शर्मा को 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने उन्हें 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब 22 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट में उसकी जमानत पर सुनवाई होगी। पुलिस ने बताया कि गिरफ्त में आए आरोपियों के पास से कई मोबाइल, लैपटॉप और अन्य सामग्री बरामद की गई है। स्पेशल सेल की टीम उनसे पूछताछ कर रही है। राजीव शर्मा यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया, द ट्रिब्यून, फ्री प्रेस जर्नल, सकाल जैसे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं। पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए राजीव के करीबियों पर भी नजर रख रही है। उसके नेटवर्क से जुड़े कई लोग शक के दायरे में हैं।

हर सूचना के बदले मिलते थे 1000 डॉलर

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि फ्रीलांस पत्रकार राजीव शर्मा ने रक्षा संबंधी अहम गोपनीय सूचनाएं चीन को देकर डेढ़ साल में 40 लाख रुपये कमाए हैं। पुलिस ने दावा किया कि राजीव शर्मा को प्रत्येक सूचना के बदले 1000 डॉलर मिलते थे। DCP ने बताया कि राजीव शर्मा चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में रक्षा मामलों पर लेख लिखते थे और वर्ष 2016 में चीनी एजेंट के संपर्क में आए थे। वह कुछ चीनी खुफिया अधिकारियों के संपर्क में भी थे। राजीव शर्मा 2016 से 2018 तक चीनी खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील रक्षा और रणनीतिक जानकारी देने में शामिल थे। इसके लिए वह विभिन्न देशों में कई स्थानों पर चीनी खुफिया अधिकारियों से भी मिलते थे। इन मीटिंग्स में भारत-चीन सीमा मुद्दे पर, सीमा पर सेना की तैनाती और सरकार द्वारा तैयार रणनीति आदि की जानकारी साझा की जाती थी।

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