पंजाब में फिर पटरी पर दौड़ेगी रेल, किसान 15 दिनों के लिए 'रेल रोको आंदोलन' खत्म करने को तैयार

पंजाब सरकार की अपील पर किसान 15 दिन के लिए रेल रोको आंदोलन समाप्त करने को तैयार हुए हैं
अपडेटेड Nov 23, 2020 पर 08:53  |  स्रोत : Moneycontrol.com

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों (Farm Bills) का विरोध कर रहे पंजाब के विभिन्न किसान संगठनों ने शनिवार को घोषणा की कि यात्री ट्रेनों की आवाजाही के लिए वे 23 नवंबर से 15 दिनों के लिए अपने रेल रोको आंदोलन (Rail Roko Andolan) को वापस ले रहे हैं। पंजाब सरकार की अपील पर किसान 15 दिन के लिए रेल रोको आंदोलन समाप्त करने को तैयार हुए हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि मांगें नहीं पूरी होने पर वे फिर प्रदर्शन करेंगे। राज्य में यात्री ट्रेनों की आवाजाही की अनुमति देने का फैसला पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) के साथ किसान नेताओं के प्रतिनिधियों की एक बैठक के बाद आया है। मुख्यमंत्री ने किसानों के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था।


सीएम अमरिंदर सिंह ने शनिवार को ट्वीट कर लिखा, किसान यूनियनों के साथ एक सार्थक बैठक हुई। यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि 23 नवंबर की रात से किसान यूनियन ने 15 दिनों के लिए रेल अवरोधों को समाप्त करने का निर्णय लिया है। मैं इस कदम का स्वागत करता हूं, क्योंकि यह हमारी अर्थव्यवस्था को सामान्य स्थिति बहाल करेगा। मैं केंद्र सरकार से पंजाब के लिए रेल सेवाओं को फिर से शुरू करने का आग्रह करता हूं।


मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से मुलाकात करने से पहले किसान संगठनों ने रेल रोको आंदोलन पर विचार-विमर्श करने के लिए अपनी बैठक की। कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठन 24 सितंबर से रेल रोको आंदोलन कर रहे थे। पहले उन्होंने राज्य में मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए सहमति दी थी। हालांकि, ट्रेनों की बहाली को लेकर प्रदर्शनकारी किसानों और रेलवे के बीच गतिरोध जारी रहा।


किसान संगठनों का कहना था कि अगर केंद्र राज्य में पहले मालगाड़ियों का संचालन शुरू करता है तो वे यात्री ट्रेनों को चलाने की अनुमति देंगे। लेकिन रेलवे ने मालगाड़ियों को फिर से चलाने से इनकार कर दिया और कहा कि वह मालगाड़ी और यात्री ट्रेनों, दोनों का संचालन करेगा या किसी का भी संचालन नहीं करेगा। किसान संगठनों पर उद्योगों का भी दबाव था, जिन्हें राज्य में मालगाड़ियों के नहीं चलने से करीब 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


24 सितंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के कारण 3,850 मालगाड़ियों का संचालन प्रभावित हुआ है। अब तक 2,352 यात्री ट्रेनों को रद्द किया गया या उनके मार्ग में परिवर्तन किया गया। रेलवे ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार के कृषि सुधार कानूनों के खिलाफ किसानों द्वारा जारी विरोध के कारण उसे यात्री राजस्व में 67 करोड़ रुपये सहित 2,220 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


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